औद्योगिक क्रान्ति सर्वप्रथम इंग्लैण्ड में होने के कारण - industrial revolution first happened in england

औद्योगिक क्रान्ति सर्वप्रथम इंग्लैण्ड में होने के कारण - industrial revolution first happened in england


इंग्लैंड में जार्ज तृतीय के शासनकाल से पूर्व शिल्पकारों की वस्तुयें साधारणतया हाथ से ही बनायी जाती थी। वहां बड़े-बड़े कारखाने नहीं थे। शिल्पकार अपने निवास स्थान पर ही कुटीर उद्योग के रूप में वस्तु तैयार करते थे। परन्तु 18वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में इंगलैंड के व्यवसाय, व्यापार और शिल्पकारी के क्षेत्रों में इतने महान् परिवर्तन हुए कि देश की कायापलट हो गई। इन परिवर्तनों के कारण उस काल तक अपनाई हुई वस्तु निर्माण प्रणाली को पूरी तरह बदल कर नवीन विधि से उत्पादन किया जाने लगा। उस समय तक जिन वस्तुओं को शिल्पी अपने हाथ से बनाते थे अब उनका निर्माण मशीनों द्वारा किया जाने लगा।

बड़े- बड़े नगरों में विशाल कारखानों की स्थापना होने लगी। कपड़ा बुनने, सूत कातने, कृषि यन्त्र बनाने और अन्य अनेक उपयोगी वस्तुयें तैयार करने के लिये नवीन वस्त्रों और मशीनों का अविष्कार किया जाने लगा। फलतः इंगलैंड के व्यापारिक, आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में परिवर्तन होने लगे। देश कृषि प्रधान के स्थान पर व्यवसाय प्रधान बन गया। इंग्लैण्ड में सर्वप्रथम औद्योगिक क्रान्ति होने के कारण निम्नलिखित हैं- 


आंतरिक शांति और बाह्य सुरक्षा


ब्रिटेन यूरोप से समुद्र द्वारा अलग रहा है।

ब्रिटेन की जल सेना ने बाहरी आक्रमणों से रक्षा कर आंतरिक शांति और बाहरी सुरक्षा स्थापित करने में बड़ी सहायता की। देश में राजनीतिक स्थिरता, शांति और कानून व्यवस्था होने से देश में लोगो में नवीन विचारधाराएँ उत्पन्न हुई।


इंग्लैण्ड में प्रगतिशील समाज


अन्य यूरोपीय देशों के समाज की भाँति इंग्लैण्ड का समाज नहीं था। झग्लैण्ड के समाज में सामन्ती व्यवस्था, निरंकुश शासन के अत्याचार और शोषण, दास प्रथा आदि नहीं थे।

वहाँ के नागरिकों को राजनीतिक स्वतंत्रता और मौलिक अधिकार प्राप्त थे जो अधिकांश यूरोपवासियों को प्राप्त नहीं थे। ऐसा समाज स्वतंत्र चिन्तन और आविष्कारों के लिये प्रेरणादायक था। इस समाज में मध्यम वर्ग और निम्न वर्ग की जनसंख्या में खूब वृद्धि हुई। इससे उद्योगों के विकास में पूँजी और श्रमिक सरलता से उपलब्ध हो सके। 


पूँजी का संचय और आर्थिक दृढ़ता


ब्रिटेन के बाजारों में विभिन्न वस्तुओं की बढ़ती हुई माँग को पूरा करने के लिये अनेक व्यापारी कारीगरों को अपने घर पर एकत्र करने लगे और कच्चे माल तथा उत्पादन के साधनों की आपूर्ति करके दैनिक मजदूरी प्रणाली से उनसे अधिकाधिक उत्पादन करने लगे।

इस पद्धति से झलैण्ड में कारखाने बनना प्रारंभ हुए, जिससे उत्पादन के वेग और परिमाण में वृद्धि हुई वस्तुओं के उत्पादन और बिक्री के बढ़ने से कारखानों के स्वामियों के पास संपत्ति एकत्र होने लगी और इससे पूँजी का संचय हुआ।


इस पूँजी का उपयोग इंग्लैंड की औद्योगिक क्रान्ति में हुआ। अन्य देशों की तुलना में झलैण्ड में बैंक प्रणाली बहुत पहले विकसित हो चुकी थी। धन के बाहुल्य से इस बैंक प्रणाली का खूब विकास हुआ। बैंकों द्वारा एकत्रित धनराशि का उपयोग औद्योगिक विकास के लिये किया गया।


इसके अतिरिक्त इंग्लैण्ड का सामुद्रिक व्यापार अत्यधिक बढ़ने से देश की व्यावसायिक, औद्योगिक और आर्थिक दशा अच्छी बन गई। बढ़ते हुये ब्रिटिश साम्राज्य के बल पर, पूर्वी देशों से अधिकाधिक व्यापार करके, ब्रिटेन ने अधिकतम संपत्ति अर्जित की। भारत से भी ब्रिटेन ने करोड़ों रूपये प्राप्त किये। इतिहासकार कनिंघम के अनुसार, “1757 ई. के बाद के पच्चीस वर्षों में राजनीतिक तथा व्यापारिक आदि अनेक भले- बुरे मार्गों से इंग्लैण्ड ने भारत से करोड़ों रूपयों की लूट की। " इंग्लैण्ड में यह पूँजी नये-नये कारखानों के लगाने में काम आयी। इस नवीन संचित पूँजी के आधार पर विज्ञान के नवीन सिद्धांतों और आविष्कारों का प्रयोग उद्योग-व्यवसायों में सफलतापूर्वक किया जा सका।