महात्मा गांधी पुनः दक्षिण अफ्रीका में - Mahatma Gandhi back in South Africa

 महात्मा गांधी पुनः दक्षिण अफ्रीका में - Mahatma Gandhi back in South Africa


गांधी जी 1902 ई. में भारतवंशियों के बुलावे पर फिर से दक्षिण अफ्रीका गए। गांधी जी ने ट्रांसवाल के सर्वोच्च न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में अपने को पंजीकृत कराया और 'ट्रांसवाल ब्रिटिश इंडियन एसोसिएशन की स्थापना की। 1904 ई. में जोहान्सबर्ग से नटाल के लिए जाते समय गांधी जी ने हेनरी पोलक द्वारा दी गई रस्किन की पुस्तक 'अण्टु दिस लास्ट पढ़ी। गांधी जी को इस पुस्तक ने गहरे रूप से प्रभावित किया और गांधी ने इस पुस्तक का अनुवाद गुजराती में सर्वोदय' नाम से किया। 'सर्वोदय सिद्धांतों पर अमल करने के प्रयत्न फलस्वरूप फीनिक्स फार्म' (1904) की स्थापना हुई। फीनिक्स फार्म से 'इंडियन ओपीनियन' नामक पत्र का प्रकाशन प्रारंभ किया,

जो पूर्णत: सहकारिता एवं श्रमदान के नियम पर संचालित होता था। गांधी जी के अनुसार इस पत्र का मुख्य उद्देश्य था पूरे विश्व में जहाँ कहीं भी भारतीय रहते हों, उन तक सत्याग्रह से संबंधित घटनाओं को पहुँचाना तथा सत्याग्रह की शिक्षा और सामुदायिक जीवन के प्रयोग की जानकारी दक्षिण अफ्रीका के अलग राज्यों में बसे भारतवंशियों को देना। गांधी ने आहारविज्ञान एवं प्राकृतिक चिकित्सा पर अनेक लेख गुजराती में लिखे, जो हिंदी में 'आरोग्य दर्शन' नामक पुस्तक में संकलित व प्रकाशित हुए। 1906 ई. में गांधी ने जुलू विद्रोह (जुलू अफ्रीकी मूल के लोग) के समय इंडियन स्ट्रेचर बेअरर कोर की स्थापना की। सार्वजनिक सेवा और सत्याग्रह के लिए 1906 ई. में गांधी जी ने ब्रह्मचर्य व्रत पालन करने का निर्णय लिया।