महमूद गजनवी लुटेरा एक ऐतिहासिक विवाद - Mahmud Ghaznavi the robber a historical controversy
महमूद गजनवी लुटेरा एक ऐतिहासिक विवाद - Mahmud Ghaznavi the robber a historical controversy
यह विषय बड़ा विवादग्रस्त है कि महमूद एक लुटेरा था। कुछ विद्वानों की धारणा है कि वह लुटेरा था, जिसका भारत पर आक्रमण करने का उद्देश्य भारत से धन लूटना था। वह भारत में न इस्लाम का प्रचार करना चाहता था और न अपने राज्य की स्थापना ही। उसने तो केवल भारत में मंदिरों को नष्ट-भ्रष्ट किया और वहाँ से अतुल संपत्ति प्राप्त की जिसका उसने मध्य एशिया में अपने साम्राज्य विस्तार के लिए प्रयोग किया। उसने विजित प्रदेशों में किसी प्रकार की शासन व्यवस्था की स्थापना नहीं की। वह आँधी के समान भारत में आया और आँधी की तरह चला गया।
उसने केवल पंजाब पर अधिकार किया। जिससे वह उसे आक्रमण के आधार के रूप में प्रयोग कर सके। उक्त बातों के आधार पर ही प्रसिद्ध इतिहासकार विन्सेंट स्मिथ का कथन है कि वह एक मात्र लुटेरा था, इसके अतिरिक्त कुछ नहीं। इस मत के विपरीत श्री वैद्य का कथन है कि वह लुटेरा नहीं था, वरन एक राजनीतिज्ञ था। उसने भारत की विजय धीरे-धीरे की और संपूर्ण भारत पर एक साथ विजय करने का प्रयत्न नहीं किया, क्योंकि वह जानता था कि इस प्रकार भारत को विजय करना कठिन है। वह दूरस्थ प्रदेशों से वार्षिक कर लेकर ही संतुष्ट हो जाता था। श्री वैद्य का तर्क उचित नहीं है। यह सत्य है कि उसने अपने मध्य एशिया के साम्राज्य में उचित व्यवस्था की ओर ध्यान नहीं दिया। वास्तव में उसके भारत पर आक्रमण का उद्देष्य धन प्राप्त करने के अतिरिक्त और कुछ भी नहीं था। अतः वह लुटेरा था और कुछ नहीं।
गजनी साम्राज्य का पतन
1030 ई. में एक विशाल साम्राज्य की स्थापना करने के उपरांत महमूद की मृत्यु हो गई। उसके बाद उसका पुत्र मसूद अपने भाई मुहम्मद को परास्त कर गजनी के सिंहासन पर आसीन हुआ। वह अपने पिता का योग्य पुत्र था। उसके शासन काल में उसका दरबार तथा उसकी शान मध्य एशिया के दरबारों में अद्वितीय थी। वह बड़ा वीर और साहसी युवक था। वह भी अपने पिता के समान युद्ध प्रिय था। किंतु उसके शासन काल में पंजाब का शासन शिथिल हो गया था। इसी समय मध्य एशिया में अन्य तुर्कों का दवाब बढ़ने लगा। इस वंश का अंतिम शासक बहरामशाह था, जिसकी 1052 ई. में मृत्यु हो गई। उसके शासनकाल में गजनी में तुर्कों का प्रभाव बढ़ गया और तुर्की ने उसके उत्तराधिकारियों को गजनी छोड़ने पर मजबूर कर दिया और शासन पर अधिकार कर लिया।
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