महमूद गजनवी - Mahmud Ghaznavi

महमूद गजनवी - Mahmud Ghaznavi


महमूद गजनवी गजनी का शासक और कट्टर मुसलमान था। उसका जन्म | नवंबर 971 ई. को हुआ। 998 ई. में वह गजनी के सिंहासन पर बैठा। उसने भारत पर सत्रह बार आक्रमण किए। आक्रमण के समय भारत की स्थिति- भारत अनेक छोटे-छोटे राज्यों में विभक्त था। भारतीय शासकों में संगठित होकर शत्रु का सामना करने की क्षमता का उदय नहीं हुआ था। उस समय भारत में ये राज्य थे- (1) पंजाब का हिंदूशाही राज्य, (2) कश्मीर का राज्य, (3) कन्नौज राज्य, (4) बंगाल राज्य, (5) गुजरात राज्य, (6) चोल राज्य, (7) चालुक्यों का राज्य आदि। सामाजिक स्थिति अराजकता और अव्यवस्था का प्रसार होने के कारण भारतीयों का सामाजिक स्तर बहुत नीचा हो गया था।

समाज में ऊँच-नीच का भेदभाव पूर्णरूप से था। लोगों में आध्यात्मिक उन्नति का चाव नहीं था। वाममार्गियों का असीम प्रभाव था। मठों, विहारों और मंदिरों को भोग-विलास का साधन समझा जाने लगा था। देव-दासियों को भोग की वस्तु माना जाता था। आर्थिक स्थिति- भारत में धन-धान्य की बहुलता और समृद्धि का प्रसार था। राजाओं और अमीरों का जीवन भ्रष्ट हो गया था। मंदिरों में अटूट धन भरा था। व्यापार भी उन्नत था। भारत अपनी समृद्धि के कारण सोने की चिड़िया कहलाता था।


महमूद गजनवी के आक्रमण के उद्देश्य थे:- (1) इस्लाम धर्म का प्रचार,

(2) अटूट संपत्ति प्राप्त करना। महमूद के 17 आक्रमण :- (1) पंजाब पर आक्रमण (2) सीमांत नगरों पर आक्रमण (3) भेरा पर आक्रमण, (4) मुल्तान विजय, ( 5 ) सेवक पाल पर आक्रमण (6) आनंदपाल पर आक्रमण (7) तलावड़ी का युद्ध, (8) मुल्तान पर दूसरा आक्रमण (9) थानेश्वर पर आक्रमण (10) लाहौर पर आक्रमण, (11) कश्मीर पर आक्रमण, (12) मध्य भारत पर आक्रमण, (13) कालिंजर पर आक्रमण (14) पंजाब पर आक्रमण, (15) ग्वालियर और कालिंजर पर आक्रमण (16) सोमनाथ के मंदिर पर आक्रमण (17) खोखरों पर आक्रमण |


महमूद की मृत्यु :- 30 अप्रैल 1030 ई.।


आक्रमणों का प्रभाव : भारत पर कोई स्थायी प्रभाव नहीं पड़ा। उसने आक्रमण तो विभिन्न नगरों पर किए.

परंतु पंजाब के अतिरिक्त अन्य किसी प्रांत को अपने राज्य में नहीं मिलाया। उसकी विध्वंसात्मक नीति के कारण हिंदू जाति इस्लाम और मुसलमानों से घृणा करने लगी, जिससे दोनों धर्मों के अनुयायियों में मेल-जोल नहीं बढ़ाया जा सका। अन्य प्रभाव निम्नलिखित प्रकार हैं- (1) भारतीय राजाओं की शक्ति को आघात, (2) भारतीय सैन्य दुर्बलता का ज्ञान, (3) भारत की अतुल संपत्ति का विदेश जाना (4) स्थापत्य कला के आदर्श नमूनों का नाश, (5) पंजाब की भारत से पृथकता, (6) मुहम्मद गोरी के आक्रमणों के लिए पथप्रदर्शन, (7) मुसलमानों को भारत की जानकारी । महमूद का चरित्र


वह कुरूप था, परंतु शारीरिक गठन आकर्षक था। उत्साह और सैन्य संचालन की कुशलता से भरपूर था। विश्व के महान सेनापतियों में तुलना की जा सकती है। वह स्वाभाविक नेता, दूरदर्शी और संकल्प का दृढ़ व्यक्ति था। इतिहास में स्थान स्वयं अशिक्षित होते हुए भी विद्वानों का बड़ा आदर करता था। स्त्रियों के साथ इसका अच्छा व्यवहार था। उसका न्याय बड़ा कठोर था। अन्याय और व्यभिचार से उसे घृणा थी। वह बड़ा धर्मांध और कट्टर व्यक्ति था। परंतु शासक की दृष्टि से वह शून्य था। इतिहास में अपने कार्यों के आधार पर उसे उच्च स्थान प्राप्त है। मुसलमान उसे गाजी मानते थे। हिंदुओं की दृष्टि में वह आक्रमणकारी, लुटेरा और हत्यारा था।