प्रमुख राजपूत वंश - Major Rajput clan

प्रमुख राजपूत वंश - Major Rajput clan


पूर्व मध्यकाल में भारत की राजनीतिक एकता समाप्त हो गई और देश के विभिन्न भागों में सामंतों द्वारा छोटे-छोटे राजपूत राज्यों की स्थापना की गई। प्रमुख राजपूत वंश निम्नलिखित थे-


गुर्जर - प्रतीहार वंश


वंशावली


(1) नागभट्ट प्रथम,


(2) कुकस्थ,


(3) देवराज,


(4) वत्सराज (लगभग 775-800 ई.),


(5) नागभट्ट द्वितीय (लगभग 800-833 ई.),


(6) रामभद्र (लगभग 833-836 ई.),


(7) मिहिरभोज (लगभग 836-885 ई.), (8) महेन्द्रपाल प्रथम (लगभग 885-910 ई.).


(9) भोज द्वितीय (910-912 ई.),


(10) महीपाल प्रथम (लगभग 912-945 ई.),


(11) महेन्द्रपाल द्वितीय (लगभग 945-948 ई.), 


(12) देवपाल ( लगभग 948-950 ई.),


(13) विनायकपाल द्वितीय,


(14) महीपाल द्वितीय,


(15) विजयपाल द्वितीय, 


(17) त्रिलोचनपाल,


(16) राज्यपाल,


(18) यशः पाला प्रमुख शासक: वत्सराज, नागभट्ट द्वितीय, मिहिरभोज, महेन्द्रपाल प्रथम और महीपाल प्रथम । वत्सराज


यह इस वंश का चैथा शक्तिशाली नरेश था। राजस्थान में भट्टी जाति के नरेश तथा गौड़ राजा धर्मपाल को उसने पराजित किया। पर वह राष्ट्रकूट नरेश ध्रुव द्वारा पराजित हुआ। इसी के समय से मध्यदेश या कन्नौज राज्य पर अधिकार करने के लिये प्रतिहारों, राष्ट्रकूटों और पालों में होड़ प्रारंभ हो गई नागभट्ट द्वितीय


वत्सराज के बाद उसका पुत्र नागभट्ट द्वितीय राजा बना। उसने सन् 805 से 833 तक शासन किया। वह बड़ा प्रतापी, वीर, साहसी और महत्वाकांक्षी नरेश था।

उसने राष्ट्रकूट राजा से अपने पिता की पराजय का बदला लेने के लिये राष्ट्रकूट नरेश गोविंद तृतीय पर आक्रमण किया, परंतु उसे सफलता नहीं मिली और वह पराजित हुआ, परंतु बाद में उसने जैसा कि वानीदिन्दोरी व राधनपुर के अभिलेखों से विदित होता है, अपनी शक्ति को दृढ़ कर लिया, बंगाल के राजा धर्मपाल को मुंगेर के पास हराया, कन्नौज पर आक्रमण कर वहाँ के राजा चक्रायुध को पराजित किया और अपनी राजधानी मालवा में अवन्ती (उज्जैन) से हटाकर कन्नौज ले गया। जैसा ग्वालियर अभिलेख से विदित होता है। उसने उत्तरी सौराष्ट्र, मालवा, पूर्वोत्तरी राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, कौशाम्बी और तरूष्क (सिंध के अरब) पर विजय प्राप्त की। इससे उसकी प्रतिष्ठा में वृद्धि हुई। उसने अपनी सफलताओं से एक प्रांतीय राज्य को प्रथम श्रेणी का सैनिक और राजनीतिक शक्ति का राज्य बना दिया और एक स्थिर साम्राज्य स्थापित किया। 


मिहिरभोज


रामभद्र के बाद उसका पुत्र मिहिरभोज कन्नौज के राजसिंहासन पर बैठा। उसने प्रतिहारों के लुप्त वैभव को पुनः प्राप्त किया और उसके गौरव व प्रतिष्ठा में वृद्धि की। उसने शीघ्र ही संपूर्ण मध्यदेश पर अपना आधिपत्य कर लिया। राजस्थान और पूर्वी पंजाब भी उसके राज्य में सम्मिलित थे। उसने पूर्व की ओर अपने राज्य का विस्तार करने का प्रयास किया पर बंगाल के पालवंशीय राजा देवपाल द्वारा पराजित हुआ। दक्षिण में भी उसने अपना विस्तार करने का प्रयत्न किया, राष्ट्रकूट नरेश ध्रुव द्वितीय और कृष्ण द्वितीय से उसके अनिर्णायक युद्ध हुए। फलतः नर्मदा नदी तक ही उसका राज्य विस्तृत रहा। डॉ. आर. सी. मजूमदार के मतानुसार मिहिरभोज एक सुयोग्य और सफल शासक था।

वह अपने राज्य में शांति बनाये रखने और बाहरी आक्रमणों से उसे सुरक्षित रखने में समर्थ था। मुस्लिम आक्रमणों के सामने वह रक्षा की दीवार की भाँति था। वह कट्टर हिंदू था और इस्लाम का प्रबल विरोधी था। अरब यात्री सुलेमान ने, जो उसके शासन काल में भारत आया था, उसके प्रशासन, राज्य के व्यापार व समृद्धि और अश्वारोही सैनिक बल की बड़ी प्रशंसा की है।


महेन्द्रपाल प्रथम


अपने पिता मिहिरभोज की तरह वह भी सबल और महत्वाकांक्षी नरेश था। उसने मगध, उत्तरी बिहार और उत्तरी बंगाल को जीतकर अपने राज्यों में सम्मिलित कर लिया।

पश्चिम में सौराष्ट्र और उत्तर में करनाल तक उसकी सीमा थी। वह अत्यंत उदार विद्यानुरागी था। उसके राज्याश्रय में प्रसिद्ध कवि नाटककार और रीतिकार राजशेखर रहता था, जिसने कर्पूर-मंजरी, बालरामायण, बालभारत और काव्य- मीमांसा ग्रंथों की रचना की। महिपाल प्रथम


महेन्द्रपाल के बाद उसका पुत्र भोज द्वितीय नरेश हुआ। पर उसके बन्धु महिपाल ने उसे हटा कर स्वयं राजसत्ता अपने अधिकार में कर ली। उसे दीर्घकाल तक अशांति और शत्रुओं का सामना करना पड़ा। राष्ट्रकूट राजा इन्द्र द्वितीय ने उस पर आक्रमण किया और कन्नौज तथा प्रयाग तक के क्षेत्र में उसने लूट-पाट की। बंगाल के पाल नरेश ने भी इस स्थिति का लाभ उठाकर पश्चिम में अपने राज्य का विस्तार सोन नदी के पूर्वी तट तक कर लिया। अपने शासन के अन्तिम काल में महिपाल को राष्ट्रकूट नरेश कृष्ण तृतीय से भी संघर्ष करना पड़ा। इतनी असफलताओं के होने पर भी महीपाल ने प्रतिहार साम्राज्य की उसके प्रतिद्वन्दियों और शत्रुओं से रक्षा की तथा उसकी शक्ति और गौरव को बनाये रखा।