विवाह संस्कार - Marriage rituals

विवाह संस्कार - Marriage rituals


समाज में संयुक्त परिवार प्रथा प्रचलित थी। अंतर्जातीय विवाह संबंधों में कठोरता न थी । समाज में अनुमोल विवाह प्रचलित थे। इब्नखुर्दबदा व अलबरूनी का कथन है कि व्यक्ति अपने वर्ण तथा अपने वर्ण से एक नीचे वर्ण से विवाह संबंध कर सकता था। उसके इस कथन की सत्यता प्रतीहार वंश के संस्थापक हरिचन्द्र के क्षत्रिय कन्या भद्रा के साथ हुए विवाह से पुष्ट होती है।

राजशेखर की 'कर्पूरमंजरी' में भी उल्लेख है कि ब्राह्मण राजशेखर का विवाह क्षत्रिय कन्या अवन्ति सुंदरी के साथ हुआ था परंतु समाज में इन विवाहों को हेय दृष्टि से देखा जाता था। प्रतिलोम विवाह का समाज में प्रचलन न था। अलबरूनी कहता है कि व्यक्ति को अपने से उच्च वर्ण की कन्या से विवाह का निषेध था। इब्नखुर्दबदा भी इस कथन की पुष्टि करता है। माता-पिता के गोत्र में विवाह वर्जित था। समाज में बाल विवाह प्रथा प्रचलित थी। बहुविवाह प्रथा का भी समाज में प्रचलन था।

अलबरूनी का कथन है कि एक व्यक्ति चार विवाह कर सकता था। समाज के उच्च वर्ग में यह अधिक प्रचलित था।


विवाह विच्छेद तत्कालीन हिंदू समाज में संभव न था, पति-पत्नी मृत्यु द्वारा ही एक दूसरे से अलग हो सकते थे। विधवा विवाह का समाज में प्रचलन न था। नियोग प्रथा को समाज में सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा जाता था। सती होना समाज में सम्मान की दृष्टि से देखा जाता था। अलबरूनी का कथन है कि मृत राजा के शव के साथ उसकी सभी पत्नियाँ अग्नि में प्रवेश करती थीं। इस काल में सती प्रथा में रूढ़ता आ गई थी।