खानकाहों में भौतिक जीवन - material life in khanqahs

खानकाहों में भौतिक जीवन - material life in khanqahs


इस समय कई सूफी खानकाह काफी समृद्ध थे, उन्हें राजकीय सहायता मिलती थी, राज्यों के साथ सूफियों के संबंध थे और कई सूफी भूमिपति भी बन गए। आदर्श तौर पर आरंभिक चिश्ती खानकाहों में रहते थे और ये दरबार और सामाजिक ऊँच-नीच के वातावरण से दूर समता के माहौल में रहा करते थे। आपने गौर किया होगा कि समग्र रूप में चिश्तियों ने स्थापित सामाजिक और राजनीतिक संरचना को स्वीकार किया। उनका और मानना था कि इसका कोई विकल्प नहीं है। इसके बावजूद उनके खानकाहों में इस सामाजिक संरचना और असमानता का प्रभाव नहीं पड़ा। खानकाह में रहने वाले अनुयायी और तीर्थयात्रा एक समतावादी परिवेश का अनुभव करते थे।

ऐसे खानकाह अपने खर्च के लिए सरकारी संरक्षण पर नहीं, बल्कि फुतूह (नि:स्वार्थ दान) पर आश्रित थे।


चिश्ती खानकाहों का दरवाजा समाज के प्रत्येक सदस्य और समुदाय के लिए खुला था। कलंदर और जोगी अक्सर खानकाहों में टिका करते थे। खानकाहों ने अनेक तरीके से आर्थिक जीवन को भी प्रभावित किया। कुछ खानकाह बंजर भूमि पर खेती करते थे, कुछ धार्मिक इमारतें बनवाते थे, बाग-बगीचे लगवाते थे। खानकाहों ने शहरीकरण की प्रक्रिया में भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। वार्षिक उसे (आध्यात्मिक गुरु की मृत्यु के दिन आयोजित समारोह) के आयोजन से व्यापार, वाणिज्य और स्थानीय हस्तशिल्प के उत्पादन को बल मिला।