महात्मा गांधी का मॉरीशस प्रवास - Mauritius stay of Mahatma Gandhi

महात्मा गांधी का मॉरीशस प्रवास - Mauritius stay of Mahatma Gandhi


1901 ई. में गांधी समुद्र मार्ग से भारत लौटते हुए 29 अक्टूबर को मॉरीशस गए। जहाज एस. एस. नौशेरा में खराबी आने और रसद के लिए मॉरीशस के पोर्ट लूई के बंदरगाह पर रुके। (रामशरण, 2004: 106-07) वहाँ गांधी ने भारतीय गिरमिटिया मज़दूरों की दशा को समझा और वहाँ के भारतीय गिरमिटिया मजदूरों और व्यापारियों को संबोधित करते हुए उन लोगों को अपने जीवन को उच्च बनाने के लिए सलाह दी, जैसे अपने बच्चों को शिक्षित करो और स्वस्थ रखो, उन्हें मॉरीशस की राजनीति में आने के लिए प्रेरित करो और प्रेरणा के लिए भारत पर निगाह रखो। मॉरीशस के भारतीय गिरमिटिया मजदूरों की बदहाली से चिंतित होकर वे डॉक्टर मणिलाल को 1907 ई. में मॉरीशस भेजा।

मणिलाल, गोपाल कृष्ण गोखले द्वारा स्थापित भारतीय सेवक समाज के एक युवा सदस्य थे। वे अदालतों में गिरमिटिया असहाय मजदूरों की निःशुल्क पैरवी करते, कोठी-मालिकों की शोषण प्रवृत्ति का अपने लेखों द्वारा पर्दाफाश करते, धार्मिक विषयों पर चर्चा कर विभिन्न धर्मावलंबियों का मतभेद दूर करते, अंग्रेजी, गुजराती और हिंदी में 'हिंदुस्तानी' दैनिक पत्र को निकालकर भारतीय गिरमिटिया मजदूरों से संबंधित समाचारों को सरकार तक पहुँचाते और अपने लेखों द्वारा भारतीय गिरमिटिया मजदूरों और भारतीय लोगों के आत्मसम्मान को बढ़ाते थे।

भारतीयों में आत्मगौरव बढ़ाने के लिए 'यंग मेंस हिंदू एसोसिएशन' तथा आर्य समाज जैसी संस्थाओं की स्थापना की। 1910 ई. और 1911 ई. के भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वार्षिक अधिवेशन में मॉरीशस के भारतवंशियों का प्रतिनिधित्व किया। साथ ही, डॉक्टर मणिलाल दक्षिण अफ्रीका जाकर गांधी जी को मॉरीशस के भारतीय गिरमिटिया मजदूरों के उत्थान के लिए किए गए कार्यों का विवरण दिया करते थे। डॉक्टर मणिलाल के मॉरीशस में सत्याग्रह सुधार आंदोलन से प्रभावित होकर दो भारतीयों ने सन् 1911 ई. में चुनाव लड़े। पंडित काशीनाथ और पं. रामावद्य उच्च शिक्षा के लिए भारत गए जबकि रामखेलावन बुधन बैरिस्टरी शिक्षा के लिए विलायत पहुँचे।

इन्हीं से प्रेरित होकर मॉरीशस आर्य पत्रिका और ओरियण्टल गजट का निकलना संभव हो पाया। (रामशरण, 1995 8, 2004 7) गांधी जी के दक्षिण अफ्रीका के सत्याग्रह के अनुयायियों में एक भारतीयवंशी मॉरीशसन् नागरिक थाम्बी नायडू था। उन्हीं के जरिए गांधी जी को मॉरीशस के बारे में भारतीयों के हालात के बारे में जानकारी हुई थी। गांधीजी, डॉक्टर मणिलाल जैसे भारतीयों की प्रेरणा के कारण मॉरीशस के राजनीतिक संघर्ष में भारतीय मूल के लोग आगे रहते हुए सत्ता तक पहुँच सके जैसे- सर शिव सागर रामगुलाम मॉरीशस के प्रथम राष्ट्रपति और राष्ट्रपिता हुए।