दक्षिण पूर्व एशिया में व्यापार तंत्र के तहत प्रवासन - Migration under trade mechanisms in Southeast Asia
दक्षिण पूर्व एशिया में व्यापार तंत्र के तहत प्रवासन - Migration under trade mechanisms in Southeast Asia
यूरोपीय व्यापारियों के पहुँचने के पहले से ही भारतीय व्यापारिक समुदाय दक्षिण-पूर्ण एशिया में व्यापार के लिए जाने लगे थे, परंतु औपनिवेशिक परिस्थितियों के कारण 19वीं सदी के बाद इसमें तीव्र वृद्धि हुई। 1844-1931 ई. तक व्यापारी समुदाय का सिर्फ मलाया के लिए प्रवासन 643,000 था। इसी तरह के भारतीय व्यापारिक समुदायों का प्रवासन बर्मा तथा अन्य दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के लिए हुआ।
इन प्रवासित व्यापारिक समुदायों में मुख्यतः नडुकोट्टी चेट्टियार, चुलिया, मराक्कायार, मप्पिला या मोपलाह (केरल), दाउदी बोहरा, खोजा, सिंधी,
सिख, मारवाड़ी आदि थे। चेट्टियार व्यापारी 1830 ई. के आस-पास तमिलनाडु तथा केरल से प्रवासित होकर मलाया, बर्मा, श्याम, जावा और सुमात्रा तक गए। मुस्लिम व्यापारिक समुदाय दाउदी बोहरा सूरत से प्रवासित होकर बैंकाक गए। 19वीं सदी में सिंधी पहले सिंगापुर, बाद में पेनांग और मनीला में भी बसे। 1947 ई. में सिंधी प्रवासन बढ़ा जब भारत का विभाजन होकर सिंध प्रांत पाकिस्तान का अंग बना। 19वीं सदी में सिख समुदाय का प्रवासन पहले चौकीदार, पहरेदार, पुलिसबल के रूप में दक्षिण-पूर्व एशिया में और बाद में व्यापारिक समूह, जैसे- वस्त्र व्यवसाय, स्पोर्ट सामग्री के व्यवसाय आदि से जुड़कर सिंगापुर, मलाया, थाईलैंड में बस गए।
इनके अलावा, छोटे व्यापारिक समूह के रूप में राजस्थान के मारवाड़ी तथा हिंदू 1850 ई. में आस-पास बर्मा प्रवासित हुए।
दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में भारतीय व्यापारियों के प्रवासन का संबंध 19वीं सदी में उभर रहे वैश्विक पूँजीवादी व्यवस्था से था। 19 वीं सदी में दक्षिण-पूर्ण एशिया में यूरोपीय औपनिवेशिक विस्तार के कारण उपयोगी वस्तुओं की व्यावसायिक माँग बढ़ी। इनमें निम्न वस्तुएँ शामिल थी- चावल, चाय, कॉफी और रबर इत्यादि। दक्षिण पूर्व एशिया में व्यापार बढ़ने का एक कारण था भारत का 1857 ई. के विद्रोह के बाद की भारतीय परिस्थिति। 1857 ई. के बाद देशी रियासतों में व्यापार के मौके कम हो गए थे, इसलिए भी व्यापारिक वर्ग दक्षिण-पूर्व एशिया की तरफ मुड़े। ब्रिटिश प्रशासन के द्वारा नए व्यापारिक केंद्र भी स्थापित किए गए। गुजराती मुस्लिम व्यापारी तथा मेमन, खोजा, बोहरा दक्षिण-पूर्व में वस्त्र, घरेलु सामान, चावल और हीरे के व्यापार से जुड़े थे।
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