मुहम्मद गोरी की अन्य विजय - Other conquests of Muhammad Ghori
मुहम्मद गोरी की अन्य विजय - Other conquests of Muhammad Ghori
उपरोक्त राज्यों से मुहम्मद की विजय लालसा का अंत नहीं हुआ। जब कुतुबुद्दीन राजपूतों के विद्रोह का दमन करने में व्यस्त था तो मुहम्मद अपनी विशाल सेना लेकर भारत आया। इस बार उसका उद्देश्य कन्नौज और काशी को अपने अधीन करना था। जयचंद को अकेले ही मुसलमानी सेना का सामना करना पड़ा। यमुना नदी के तट पर स्थित चंद्रवार नामक स्थान पर दोनों सेनाओं में बड़ा घमासान युद्ध हुआ। मुहम्मद की सैनिक स्थिति डावांडोल थी किंतु इस समय राजा जयचंद की आँख में तीर लगा जिससे उसकी मृत्यु हो गई। इससे राजपूतों का साहस टूट गया और उनकी सेना में भगदड़ मच गई। मुहम्मद ने परिस्थिति का लाभ उठाया और हजारों राजपूत सैनिकों का वध कर डाला।
इस प्रकार इस युद्ध में केवल भाग्य के कारण मुहम्मद को विजयश्री प्राप्त हुई। युद्ध में विजयी होने के कारण भारत का बहुत बड़ा भाग उसके अधिकार में आ गया। उसने तुरंत बनारस पर आक्रमण किया और उसको भी अपने अधिकार में किया। मुहम्मद को वहाँ से अतुल धन तथा बहुत से हाथी प्राप्त हुए। उसने बहुत से मंदिरों को नष्ट-भ्रष्ट कर डाला और उनके स्थान पर मस्जिदों का निर्माण करवाया। मुहम्मद इस विजय के उपरांत पुनः गजनी लौट गया।
मुहम्मद के गजनी चले जाने के उपरांत उसके कार्य को उसके प्रतिनिधि एवं सेनापति कुतुबुद्दीन पूरा किया। कोल में विद्रोह हुआ जिसका शीघ्र दमन कर दिया गया।
इसके उपरांत अजमेर में ऐबक ने विद्रोह हुआ। पृथ्वीराज के भाई हरिराज ने अजमेर पर अधिकार कर दिल्ली पर आक्रमण करने के लिए सेना का संगठन किया, किंतु शीघ्र ही कुतुबुद्दीन ने उस ओर प्रस्थान किया और राजपूती सेना को जो दिल्ली की ओर बढ़ रही थी, मार्ग में ही बुरी तरह परास्त किया। इसके उपरांत उसने अजमेर पर आक्रमण किया। हरिराज ने अपने को चिता में भस्म कर दिया और इस प्रकार अजमेर पर पुनः मुसलमानों का अधिकार हो गया। कुतुबुद्दीन ने अजमेर को एक तुर्क सूबेदार को सौंप दिया और पृथ्वीराज के पुत्र को रणथम्भौर का प्रदेश दे दिया।
अन्य विजय
मुहम्मद गोरी ने 1195 ई. में पुनः बियाना तथा ग्वालियर के प्रदेशों को अपने अधिकार में करने के उद्देश्य से भारत पर आक्रमण किया।
(1) बयाना पर अधिकार बयाना पर भट्टी राजपूतों का अधिकार था। यहाँ के राजा कुमारपाल ने अपने आपको दुर्ग में बंद कर लिया, किंतु बाद में उसे बाध्य होकर मुसलमानों की अधीनता स्वीकार करनी पड़ी।
(2) ग्वालियर पर अधिकार- इसके बाद मुहम्मद गोरी ने ग्वालियर पर आक्रमण किया।
अभी तक ग्वालियर का दुर्ग अभेद्य समझा जाता था। वहाँ के शासक से वार्षिक कर लेना स्वीकार कर गोरी ने उससे संधि की, किंतु कुछ समय उपरांत मुसलमानों ने उस पर अधिकार कर लिया।
(3) मेंड़ों का अधिकार- अभी तक राजपूतों ने मुहम्मद की अधीनता पूर्ण रूप से स्वीकार नहीं की थी। अजमेर के समीप के प्रदेश में निवास करने वाले मेंड़ों ने अन्य राजपूतों की सहायता से विद्रोह का झंडा खड़ा किया। उन्होंने अन्हिलवाड़ा के राजा को भी अपनी सहायता के लिए आमंत्रित किया। मेंडों ने अजमेर पर आक्रमण किया, किंतु वे सफल नहीं हो सके। इसी समय गजनी से कुछ सहायता आई, जिसके कारण राजपूतों को पीछे हटना पड़ा।
(4) अन्हिलवाड़ा की लूटमार अन्हिलवाड़ा से प्रतिशोध लेने के अभिप्राय से कुतुबुद्दीन ने उस पर आक्रमण किया। राजपूतों ने बड़ी वीरता से सामना किया, किंतु वे परास्त हुए। कुतुबुद्दीन अन्हिलवाड़ा की लूटमार कर वापस चला गया। उस समय उसमें उस पर अधिकार करने की शक्ति नहीं थी। कुछ समय तक कुतुबुद्दीन ने मुसलमानी साम्राज्य को दृढ़ किया।
(5) बुंदेलखंड पर अधिकार- 1202 ई. में उसने बुंदेलखंड के प्रदेश पर आक्रमण किया। उसने कालिंजर के दुर्ग का घेरा डाला, जिसमें उस समय वहाँ का राजा परमाल देव निवास कर रहा था।
यह दुर्ग बहुत दृढ़ था और उसकी गणना भारत के प्रसिद्ध दुर्गों में की जाती थी। मुसलमानों ने दुर्ग में पानी पहुँचने के मार्ग पर अधिकार कर दुर्ग में पानी का पहुँचना बंद कर दिया। इससे विवश होकर राजपूतों ने हथियार डाल दिए। दुर्ग पर मुसलमानों का अधिकार हो गया।
(6) बिहार की विजय - जिस समय कुतुबुद्दीन उक्त विजयों में व्यस्त था उसी समय मुहम्मद गोरी का एक अन्य दास मुहम्मद-बिन-बख्तियार खलजी पूर्वी प्रदेशों की विजयों में संलग्न था। उसको गंगा और सोन नदी के मध्य में एक जागीर प्रदान की गई थी।
वह बड़ा कुरूप और बेडोल था। उसने बहुत से खलजियों को अपनी सेना में भर्ती किया और बिहार के प्रदेश पर आक्रमण आरंभ किए अपनी शक्ति दृढ़ करने के उपरांत उसने बिहार की राजधानी उदंतिपुर पर अधिकार कर वहाँ के विशाल भवनों को नष्ट कर डाला। उसने बहुत से बौद्ध भिक्षुओं का वध कराया तथा नालंदा विश्वविद्यालय और उसके पुस्तकालय को भस्म करवाया। इसके उपरांत उसने बिहार के अन्य प्रदेशों पर अधिकार किया। इस प्रकार समस्त बिहार उसके अधिकार में आ गया। (7) बंगाल की विजय- बिहार की विजय ने मुहम्मद बिन बख्तियार खलजी के उत्साह तथा साहस में वृद्धि की।
उसने बंगाल विजय की योजना बनाई। इस समय वहाँ लक्ष्मणसेन शासन कर रहा था, जिसने अपने राज्य की सुरक्षा की ओर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। 1204 ई. में मुहम्मद-बिन- बख्तियार खलजी ने बंगाल पर आक्रमण किया। वह दुर्ग में प्रवेश करने में सफल हुआ। उस समय राजा लक्ष्मण सेन दोपहर का भोजन करने के लिए बैठा ही था। जब उसने यह समाचार सुना तो वह पिछले द्वार से भाग गया और 1206 ई. में उसकी मृत्यु हो गई। उक्त विजय के बाद मुसलमानों के अधिकार में उत्तरी भारत का अधिकांश भाग आ गया।
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