समुद्रपारीय प्रवासन - overseas migration

समुद्रपारीय प्रवासन - overseas migration


औपनिवेशिक काल में भारतीय लोगों का समुद्रपारीय प्रवासन कई रूपों में हुआ। उनमें प्रमुख थे : 


सिद्ध दोष प्रवासन (Convict Migration) 


सिद्ध दोष का अर्थ होता है- कानूनी रूप से जिनका दोष सिद्ध हो गया है। औपनिवेशिक शासन की शुरूआत में जहाँ जहाँ औपनिवेशिक प्रशासन तथा उपनिवेश स्थापित करते गए, कुछ राजाओं तथा उनके समर्थकों को जो औपनिवेशिक प्रशासन का साथ नहीं देते थे,

उन्हें किसी षड़यंत्र के तहत औपनिवेशिक व्यवस्था के अंतर्गत सजा देते थे। इन सजायाप्ता लोगों से अपने साम्राज्य को सुरक्षित रखने के लिए एक उपनिवेश के सिद्ध दोष को दूसरे उपनिवेश में भेज देते थे, जैसे- मलय के सिद्ध दोष को भारत, सिंगापुर के सिद्ध दोष को चीनी तथा हाँगकाँग, चीनी को भारत, बर्मा के सिद्ध दोष को श्रीलंका, भारत के सिद्धदोष को फिजी, मारिशस आदि। इसके अलावा औपनिवेशिक प्रशासन इन सिद्ध दोष वालों को काला पानी की सजा देते थे, जिसके तहत उन्हें अंडमान-निकोबार जैसे जगहों में भी भेजा गया।