सूरीनामी भारतीय समुदाय की राजनैतिक गतिविधियाँ - Political activities of the Surinamese Indian community
सूरीनामी भारतीय समुदाय की राजनैतिक गतिविधियाँ - Political activities of the Surinamese Indian community
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद विश्व के अन्य भागों की तरह ही कैरिबियाई क्षेत्र में भी राजनैतिक हलचल दिखी। 1946 में सूरीनामी भारतीय मूल के लोग और इंडोनेशिया के भारतवंशी जिन्हें स्थानीय तौर पर जावानीस' कहा जाता है, ने मिलकर एक संगठन 'Hindostans Javanese Centrale Raad' बनाया और इसके माध्यम से माँग की गई कि हिंदुत्व और इस्लाम के प्रति स्थानीय विद्यालयों में संवेदना का भाव रखा जाए। इसी के आधार पर जगरनाथ लछमन ने 'Hindustans Javanese- Ploitieke Partij (HJPP)' बनाई और धार्मिक लाइन से थोड़ा आगे बढ़ने की कोशिश की।
1949 ई. में HIPP ने सूरीनाम के कई हिंदू-मुस्लिम दलों को संगठित करके Verenigde Hindostaanse Partij (संयुक्त हिंदुस्तामी दल) बनाकर प्रथम चुनाव लड़ा। इस दल को लछमन के नेतृत्व में बड़ी सफलता मिली। इस राजनैतिक सफलता के द्वारा मुस्लिम लोग अपने मृतकों को दफ़नाने के अधिकार को कानूनी जामा पहनाने में सफल रहे। साथ ही होली और ईद पर्व के अवसर को राष्ट्रीय छुट्टी घोषित करवाने में भी सफल हुए।
परंतु 1947 ई. के भारत-पाकिस्तान विभाजन का असर सूरीनाम की राजनीति पर भी देखने को मिला। हिंदू-मुस्लिम के बीच एकता में कमी और अफ्रो- सूरीनामी के उत्थान ने सूरीनामी राजनीति में भारतीय मूल के लोगों के लिए मुश्किल समय ला दिया।
1950 ई. के बाद सूरीनाम की राजनीति में बहुत सारी हलचल देखी गई। सूरीनाम के दक्षिणी भाग के निकेरी जिले के नागरिक क्लेमंस विश्वामित्र सूरीनाम कोलिनियल पार्लियामेंट के पहले सदस्य हुए और 1950 ई. तक इस देश की सेवा की। डच शासकों ने अपने सूरीनामी उपनिवेश को 1954 में आंतरिक स्वशासन देने के साथ ही 18 नवंबर 1975 ई. तक इसे स्वतंत्रता भी दे दी। इसी बीच सूरीनाम ने सैनिक तख्तापलट भी 5 वर्ष के लिए देखा। 1990 ई. के बाद आम चुनाव में रुनाल्दो रोनाल्ड वेनेतियाँ राष्ट्रपति बने, हिंदुस्तानी जुल्स रतनकोइमार अजोधिया, उपराष्ट्रपति बने।
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