पेरिस शांति सम्मेलन की समस्या - problem of paris peace conference
पेरिस शांति सम्मेलन की समस्या - problem of paris peace conference
पेरिस शांति सम्मेलन को अपने उक्त उद्देश्यों को प्राप्त करना कोई सरल कार्य नहीं था। उसके समक्ष कई समस्याएँ विद्यमान थीं। सबसे बड़ी समस्या प्रमुख प्रतिनिधियों के मध्य उचित तालमेल के अभाव एवं विरोधाभासी चरित्र की थी। एक ओर क्लीमेंशू एवं लायड जार्ज जर्मनी पर प्रतिशोधात्मक संधि आरोपित करना चाहते थे तो दूसरी ओर वुडरो विल्सन जर्मनी के आत्म निर्णय के सिद्धांत की रक्षा करना चाहते थे। क्लीमेंशू एवं लायड जार्ज की महत्वाकांक्षा के मार्ग में वुडरो विल्सन के 14 सूत्र बाधाएँ उत्पन्न कर रहे थे। अतः क्लीमेंशू एवं लायड जार्ज ने संधियों का मसौदा बनाते समय वुडरो विल्सन के 14 सूत्रों की अनदेखी की। चूँकि जर्मनी ने इन 14 सूत्रों की शर्तों पर ही आत्मसमर्पण किया था, अतः जर्मनी इससे अत्यधिक नाराज हुआ।
अमेरिकी राष्ट्रपति वुडरो विल्सन के 14 सूत्र
अमेरिकी कांग्रेस के सम्मुख भाषण देते समय अमेरिकी राष्ट्रपति वुडरो विल्सन ने 8 जनवरी, 1918 को 14 सूत्रीय कार्यक्रम प्रथम बार प्रस्तुत किया। इन सूत्रों की हजारों प्रतिलिपियाँ युद्ध के दौरान मध्य जर्मनी के इलाकों में फेंकी गई थी। इन सिद्धांतों को पढ़कर ही एवं इन्हें शांति संधि का आधार मानकर जर्मनी ने युद्ध विराम स्वीकार किया था।
विल्सन के 14 सूत्र निम्नवत थे -
1. शांति के समझौते गुप्त रूप से नहीं होने चाहिए। शांति-समझौते प्रकट रूप से किए जाएँ।
2. युद्ध और शांति की स्थिति में सामुद्रिक आवागमन की स्वतंत्रता होनी चाहिए।
3. राष्ट्रों के बीच आर्थिक अवरोध हटाए जाएँ। अर्थात् किसी प्रकार की आर्थिक दीवार न रहे।
4 हथियारों (अख शख) की होड़ बंद करने के लिए अस्त्र-शस्त्रों की निम्नतम सीमा तक घटा दिया जाए। उतने ही शस्त्रास्त्र रखने की आश्वासन दें, जितने कि आंतरिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए उपयुक्त हो।
5. जनता के हितों को देखते हुए उपनिवेश संबंधी समस्याओं का उचित और निष्पक्ष फैसला हो।
रूस के प्रदेशों को खाली कर दिया जाए और अपने-अपने राजनीतिक विकास तथा राष्ट्रीय भावनाओं के
6. निर्धारण की उसकी स्वाधीनता को मान्यता दी जाए।
7. बेल्जियम से जर्मन सेना हटा ली जाए तथा उसे पूर्ण तटस्थ अस्तित्व प्रदान किया जाए।
8. फ्रांसीसी क्षेत्र स्वतंत्र किया जाए अल्सास तथा लोरेन वापस लौटा दिया जाए।
9. राष्ट्रीयता के सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए इटली की सीमाओं का पुनर्निर्धारण किया जाए।
10. आस्ट्रिया-हंगरी की जनता को पूर्ण स्वायत्त शासन स्थापित करने की स्वतंत्रता प्रदान की जाए।
11. रूमानिया, सर्विया, मांटीनीग्रो से सेनाएँ हटा ली जाएँ। अक्रांत प्रदेश वापस किए जाएँ सर्विया को समुद्र तक पहुँचने का स्वतंत्र मार्ग दिया जाए।
12. टर्की के साम्राज्य के विरुद्ध अतुर्क प्रदेशों की प्रभुता सुरक्षित रहे तथा शेष भागों को स्वायत्त शासन मिल सके। डारडेनल्ज और वासफोरस जलमडरूमध्यों में भी राष्ट्रों के जहाज स्वतंत्रतापूर्वक आ जा सकें।
13. पोलैंड को एक स्वतंत्र राज्य के रूप में स्थापित किया जाए। पोलैंड को सामुद्रिक मार्ग दिया जाए साथ ही आर्थिक, राजनीतिक तथा प्रादेशिक अखंडता की अंतरराष्ट्रीय गारंटी दी जाए।
14. छोटे-बड़े सभी राष्ट्रों को समान रूप से राजनैतिक स्वतंत्रता तथा प्रादेशिक अखंडता का आश्वासन देने के लिए एक राष्ट्र संघ की स्थापना की जाए।
समीक्षा
शांति सम्मेलन की सबसे बड़ी समस्या एवं विरोधाभास यह था कि विल्सन के सूत्रों के अनुसार गुप्त संधियों को कोई स्थान नहीं दिया जाना था। दूसरी ओर क्लीमेंशू एवं लायड जार्ज युद्ध के दौरान की गई गुप्त संधियों के तहत निर्णय लेना चाहते थे। इसको लेकर कई बार विल्सन व उनके बीच टकराव की स्थिति निर्मित हुई। वुडरो विल्सन ने इटली को फ्यूम (Fieume) का प्रदेश देने से साफ इनकार कर दिया। इसी कारण ओरलैंडो नाराज होकर सम्मेलन छोड़ कर वापस इटली चला गया।
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