पर्दा प्रथा - Purdah system

पर्दा प्रथा - Purdah system


हर्ष के समय में कोई पर्दा प्रथा न था। अबूजैद का भी कथन है कि “भारत के अनेक नरेश जब राज सभा में बैठते हैं, तब उनके साथ उनकी रानियाँ भी बैठती हैं और दरबार में उपस्थित होने वाले देशी अथवा विदेशी लोग उन्हें देखते थे। किन्तु थोड़े दिनों पश्चात् पर्दा प्रथा का प्रचार प्रारंभ हुआ पर यह प्रथा केवल कुछ राजवंशों तक ही सीमित रही। हिंदू सामन्त तथा सरदार अपने रनिवासों में भी इस प्रथा प्रारंभ करने लगे। मुसलमानों के भारत में आने के पश्चात् पर्दा प्रथा का प्रचार जनसाधारण में हुआ। समाज में पर्दा प्रथा प्रचलित थी। परंतु उसके नियम कठोर नहीं थे। अबूजैद का कथन है कि तत्कालीन अधिकांश राजा रानियों सहित राज दरबार में आते थे। मेलों और धार्मिक उत्सवों में स्त्रियाँ भाग लेती थीं। समाज में स्त्रियों का सम्मान था।