अन्य राष्ट्रों में धर्म सुधार आन्दोलन - religious reform movements in other countries

अन्य राष्ट्रों में धर्म सुधार आन्दोलन - religious reform movements in other countries


स्केन्डिनेविया में धर्म सुधार


डेनमार्क, स्वीडन और नार्वे तीनों देश मिलकर उस समय स्केन्डिनेविया कहलाते हैं। उस समय इन तीनों देशों का शासन एक ही शासक के अधीन था। इन देशों में धर्म सुधार आन्दोलन का आरम्भ 1513 ई. में क्रिश्चियन द्वितीय के शासक बनने पर हुआ।


क्रिश्चियन द्वितीय ने शासक बनते ही सामन्तों की शक्ति का दमन करने का निश्चय किया। उसने 1520 ई. में स्वीडन से स्ट्रस के कुलीन वर्ग के अधिकारों काअन्त कर दिया और इसके तीन वर्ष बाद स्वीडन के बहुत से देशभक्तों का वध करा दिया।

क्रिश्चियन द्वितीय ने डेनमार्क में निम्न वर्ग तथा मध्यम वर्ग के व्यक्तियों को भड़का कर उनसे सामन्तों के विरुद्ध विद्रोह करवा दिया।


क्रिश्चियन द्वितीय ने सामन्तों की शक्ति के दमन के लिये जर्मनी से अनेक प्रोटेस्टेंटों को बुलाया जिन्होंने नार्वे, डेनमार्क और स्वीडन में प्रोटेस्टेंट धर्म का प्रचार कर कैथलिकों को कमजोर कर दिया। प्रोटेस्टेंट धर्म का प्रसार


स्वीडन में शीघ्र ही एक धार्मिक क्रान्ति गस्टवस वासा के नेतृत्व में चारों ओर फैल गयी। क्रान्ति- कारियों ने चर्च की सम्पत्ति पर अधिकार जमा कर उसे देश की उन्नति के कार्यों में लगाना आरम्भ कर दिया।

पोप ने स्वीडन निवासियों को नास्तिक घोषित कर दिया। अतः क्रान्तिकारियों ने प्रोटेस्टेंट धर्म का प्रचार और प्रसार करना आरम्भ किया जिसके परिणामस्वरूप स्वीडन का राष्ट्रीय चर्च और राज्य धर्म दोनों ही प्रोटेस्टेंट मत के समर्थक बन गए। कैम्ब्रिज मॉडर्न हिस्ट्री में इस सम्बन्ध में लिखा है "गुस्तवस वासा के अनुयाइयों द्वारा चर्च की सम्पत्ति पर अधिकार कर लेने का परिणाम स्वीडन के कैथोलिक चर्च से सम्बन्ध विच्छेद तथा लूथरवाद के समर्थन के रूप में प्रकट हुआ। "


डेनमार्क में किसानों ने प्रोटेस्टेंट मत का विरोध तथा कैथोलिक धर्म का समर्थन किया, किन्तु राजा के समर्थन ने डेनमार्क में प्रोटेस्टेंट धर्म को प्रसारित होने में सफलता प्रदान की ओर डेनमार्क प्रोटेस्टेंट मत का अनुयायी बन गया।


स्विट्जरलैंड में धर्म सुधार


स्विट्जरलैंड में धर्म सुधार आन्दोलन का नेतृत्व अलरिच ज्विंग्ली ने किया था। उसी के कारण स्विट्जरलैण्ड में धर्म सुधार का अदभुत रीति से प्रसार हुआ। थेचर ने ज्विंग्ली के प्रचार के सम्बन्ध में लिखा है कि 1518 ई. में ग्लेरस के पादरी अलरिच ज्विंग्ली ने क्षमा पत्रों की बिक्री के सिद्धान्त का घोर विरोध किया।



उस काल में देश के बौद्धिक केन्द्र ज्यूरिक को अपने प्रचार का केन्द्र बना कर उसने शीघ्र ही सुधारवादियों के एक प्रभावशाली दल का समर्थन प्राप्त कर लिया। जिस प्रकार लूथर को जर्मनी में सफलता मिली थी उसी प्रकार विंग्ली को स्विटजरलैंड में सफलता प्राप्त हुई।