इंग्लैंड में धर्म सुधार आन्दोलन - religious reformation movement in england
इंग्लैंड में धर्म सुधार आन्दोलन - religious reformation movement in england
मार्टिन लूथर का धर्म सुधार आन्दोलन केवल जर्मनी तक ही सीमित नहीं रह सका। उसका प्रभाव शीघ्र ही अन्य यूरोपीय देशों पर पड़ने लगा। अतः अन्य देशों की भाँति इग्लैण्ड भी इसके प्रभाव से अछूता नहीं रहा और वहाँ के तत्कालीन जीवन पर धर्म सुधार आन्दोलन का प्रभाव पड़ने लगा और कालान्तर में इसका प्रभाव इंग्लैंड के उपनिवेशों पर भी दिखाई देता है।
हेनरी अष्टम के काल में धर्म सुधार
इस आन्दोलन का आरंभ सम्राट हेनरी अष्टम के शासनकाल में हुआ तथा इसका स्वरूप राजनीतिक होने के साथ-साथ व्यक्तिगत भी रहा। इंगलैण्ड में धर्म सुधार के विकास का अध्ययन निम्न शीर्षकों में किया जा सकता है-
(1) मानववादियों का प्रभाव
हेनरी अष्टम से पूर्व इंग्लैण्ड में नवीन जागरण से प्रभावित जॉन कौलेट, सर थामस मूर और इरेस्मस आदि मानव वादियों ने भी कैथोलिक चर्च और पोप की अनेक त्रुटियों और दोषों को जनता के सम्मुख रखते हुए दोनों का विरोध किया था, परन्तु उन्हें अपने प्रयास में अधिक सफलता नहीं मिल सकी और इंग्लैण्ड पोप और कैथोलिक चर्च का उपासक बना रहा।
(2) हेनरी अष्टम पोप के अनुयायी के रूप में
आरम्भ में इंग्लैण्ड का सम्राट हेनरी अष्टम पोप का समर्थक था। उसने झग्लैण्ड में लूथरवाद के प्रसार को रोकने के लिए लूथर का विरोध किया था।
उसने पोप के अधिकारों को न्यायोचित सिद्ध करने के लिये 1521 ई. में एक पुस्तक प्रकाशित की। पोप ने हेनरी अष्टम के इस कार्य से प्रसन्न होकर उसे धर्म रक्षक और गोल्डेन रोज की उपाधियाँ प्रदान की थीं। हेनरी अष्टम ने अपने देश में लूथरवादियों को कठोर दण्ड देकर उसके प्रसार की सम्भावनाएँ नष्ट कर दी थीं।
हेनरी अष्टम का पोप से विरोध
अष्टम का विवाह अपने बड़े भाई आर्थर की विधवा कैथेराइन के साथ हुआ था। वह हेनरी अष्टम से आयु में लगभग 5 वर्ष बड़ी थी। वह प्रायः बीमार रहती थी।
उसकी एक पुत्री के अतिरिक्त और कोई सन्तान जीवित न रही अतः इंग्लैंड की राजगद्दी के लिए पुत्र के रूप में कोई उत्तराधिकारी कैथेराइन से प्राप्त नहीं होने के कारण हेनरी अष्टम ने 1527 ई. में उसे तलाक देने की स्वीकृति पोप से लेनी चाही। परन्तु पोप विवाह विच्छेद की स्वीकृति देकर स्पेन के सम्राट चार्ल्स पंचम को रुष्ट नहीं करना चाहता था, क्योंकि कैथेरान चार्ल्स पंचम की बुआ थी। पोप, हेनरी अष्टम को भी अपना विरोधी नहीं बनाना चाहता था। अतः उसने विवाह विच्छेद की इस समस्या को कई वर्षों तक टालने का प्रयास किया, परन्तु हेनरी अष्टम टा ँमस बोलेन की अति सुन्दर पुत्री ऐने बोलेन के प्रेम में फँस चुका था और उसे अपनी पत्नी बनाने के लिये दृढ़ संकल्प था। अतः उसने पोप के साथ अपने सभी प्रकार के सम्बन्ध-विच्छेद कर लिये।
(4) हेनरी अष्टम के पोप विरोधी कार्य
हेनरी अष्टम ने सबसे पहले अपने पोप समर्थक मन्त्री कार्डिनल बूल्जे को प्रधान मन्त्री पद से पृथक् कर दिया और सर टॉमस क्रामवेल को अपना प्रधान मन्त्री नियुक्त किया। इसके उपरान्त उसने संसद का अधिवेशन बुलाकर उससे निम्नलिखित कार्यों को करने की स्वीकृति प्राप्त की। यह संसद अपने इन कार्यों के कारण सुधारक संसद के नाम से प्रसिद्ध है। इस संसद ने निम्न कार्यों को करने के अधिकार हेनरी अष्टम को प्रदान किये-
(1) हेनरी अष्टम को पोप तथा रोम के चर्च के साथ अपना और इंग्लैंड का सम्बन्ध विच्छेद करने का अधिकार
(2) चर्च में उत्पन्न दोषों को दूर करने के लिये नियम बनाने का अधिकार हेनरी अष्टम ने उपर्युक्त अधिकारों को प्राप्त करके निम्नांकित कार्य किए जिससे इंग्लैंड के सम्बन्ध पोप और रोम के चर्च के साथ सदैव के लिए पूर्ण रूप से विच्छेद हो गए-
(अ) ऐन्नाटेज अधिनियम
1532 ई. में हेनरी अष्टम ने इस अधिनियम को लागू किया। इसके अनुसार पोप को भेजे जाने वाले सभी प्रकार के धार्मिक करों का भेजना बन्द कर दिया गया। यहाँ तक कि पादरी लोग भी अपने प्रथम वर्ष की आय रोम नहीं भेज सकते थे। इस प्रकार के धर्मकरों की आय अब पोप के बदले हेनरी अष्टम को दी जाने लगी।
(ब) अपीलों का विधान
1553 ई. में अपीलों के विधान को लागू किया गया। जिसके अनुसार विवाह, तलाक, वसीयत तथा अंग्रेजी चर्च के निर्णय के विरूद्ध अपील पोप के पास न भेजी जाकर देश के ही चर्च के प्रमुख द्वारा सुनी जायेगी। इस अधिनियम को लागू करके हेनरी अष्टम ने तुरन्त कैथेराइन को तलाक देने की स्वीकृति प्राप्त की और उसे तलाक देकर अपनी प्रेमिका ऐने बोलेन से विवाह कर लिया। प्रमुख विधान
(स) 1535 ई. में हेनरी अष्टम ने प्रभुत्व विधान के अधिनियम को लागू कराया। इसके अनुसार इंग्लैंड के चर्च में पोप के सभी प्रकार के अधिकारों की समाप्ति कर दी गई और इंग्लैंड के राजा को अंग्रेजी चर्च का मुख्य अधिष्ठाता स्वीकार किया गया।
इस प्रकार हेनरी अष्टम इंग्लैंड का पोप बन गया। राज्य भर के सभी उच्च सदस्य कर्मचारियों को इस अधिनियम का पालन करने की शपथ लेनी पड़ी। जिसने इसका विरोध किया उसी को प्राण दण्ड दिया गया। इस तरह ऐंगलीकन चर्च इंग्लैंड के राजा के आधीन हो गया।
(द) मठों का नाश
इंग्लैंड के चर्च का अधिष्ठाता बनते ही हेनरी अष्टम ने ईसाई मठों की जाँच करानी आरम्भ की जिससे उसे पता चला कि मठों में शुद्ध और पवित्र जीवन व्यतीत करने के स्थान पर पापपूर्ण जीवन व्यतीत किया जा रहा था और मठ एक प्रकार से पोप समर्थकों के सुदृढ़ गढ़ बने हुए थे।
अतः हेनरी ने मठों की सम्पत्ति जब्त कर ली और भूमि छीनकर नीलाम कर दी। इस प्रकार हेनरी को इंग्लैंड में पोप समर्थकों के संगठन को नष्ट करने में सफलता प्राप्त हुई।
(इ) हेनरी की धार्मिक नीति
हेनरी अष्टम ने यद्यपि पोप और रोम के कैथोलिक चर्च से इंग्लैंड के सम्बन्ध पूरी तरह तोड़ दिये थे, परन्तु उसने देश के भीतर कैथोलिक धर्म का विरोध नहीं किया और मार्टिन लूथर द्वारा स्थापित प्रोटेस्टेंट धर्म का अपने देश में प्रसार नहीं होने दिया। वह कैथोलिक और प्रोटेस्टेंटों दोनों को धार्मिक दण्ड देता था।
कैथोलिकों को इसलिए कि वे पोप को अपना धार्मिक नेता स्वीकार किये हुये थे तथा प्रोटेस्टेंटों पर धार्मिक अत्याचार इसलिए करता था क्योंकि प्रोटेस्टेंट लोग कैथोलिक धर्म के विरोधी थे। हेनरी अष्टम की धार्मिक नीति के निम्नलिखित तीन प्रमुख तत्व थे
(क) अंग्रेजी भाषा में बाईबिल हेनरी अष्टम ने लेटिन बाइबिल के प्रयोग को चर्चों में वर्जित कर दिया और उसके स्थान पर अंग्रेजी भाषा में बाइबिल प्रकाशित करा कर उसका चर्चों में प्रयोग कराया।
(ख) कुछ धार्मिक क्रियाओं पर रोक हेनरी अष्टम ने रोम की धर्म यात्राओं, मृत प्राणियों के लिए क्षमापत्रों की खरीद तथा पापमोचन आदि धार्मिक क्रियाओं पर रोक लगा दी।
(ग) छः धाराओं का प्रकाशन हेनरी अष्टम ने धर्म की रक्षा के लिए छः धाराओं का प्रकाशन कराया। हेज ने इनके सम्बन्ध में लिखा है कि- "इन धाराओं में रोमन चर्च के अनिवार्य सिद्धान्त सम्मिलित थे। .
इस प्रकार हेनरी अष्टम की धार्मिक नीति का उद्देश्य इंग्लैंड में लूथर की विचारधारा के प्रसार को रोकना, कैथोलिक धर्म की रक्षा और रोम के पोप के साथ सभी प्रकार के सम्बन्धों का विच्छेद करना था।
थेचर ने इंग्लैंड के चर्च की व्याख्या करते हुये लिखा है कि- 'हेनरी अष्टम के आधीन अंग्रेजी चर्च न तो पोप से सम्बन्धित था और न प्रोटेस्टेंट था। वह तो अंग्रेजी चर्च था जिसने अपने विकास के लिए एक स्वतन्त्र मार्ग की स्थापना की थी।"
अतः हेनरी अष्टम के शासन काल में सम्पन्न किया गया धर्म सुधार आन्दोलन एक राष्ट्रीय अथवा धार्मिक आन्दोलन न होकर एक राजनैतिक आन्दोलन था। विलियम स्टब ने इसका समर्थन करते हुये लिखा है कि - ”इंग्लैंड में यह आन्दोलन, सुधार की भावना के बजाय अधिकारों और राजनीतिक मान्यताओं पर आधारित था।"
एडवर्ड षष्ठम के काल में धर्म सुधार
हेनरी अष्टम की मृत्यु के उपरान्त उसका अल्पव्यस्क पुत्र एडवर्ड षष्ठम के नाम से गद्दी पर बैठा। उसका मामा सोमरसेट का डयूक, उसका संरक्षक बना। अतः राज्य सत्ता सोमरसेट के ड्यूक के हाथ में आ गई। वह प्रोटेस्टेंट सम्प्रदाय का अनुयायी था। अतः इंग्लैंड में प्रोटेस्टेंट धर्म का प्रसार और कैथालिक धर्म की अवनति द्रुतगति से होने लगी।
सोमरसेट के डयूक ने प्रोटेस्टेंट धर्म के प्रसार के लिए निम्नलिखित कार्य किये -
(1) उसने एंग्लिकन चर्च को पूरी तरह प्रोटेस्टेंट बनाने के लिए सभी गिरजों में एक नवीन प्रार्थना पुस्तक प्रयोग कराई।
(2) उसने प्रोटेस्टेंट सिद्धान्तों पर आधारित 42 धाराओं वाले नियम का गिजों में प्रयोग कराया
(3) उसने कैथोलिकों की मासपूजा पर प्रतिबन्ध लगा कर उसे रोक दिया।
(4) सभी गिर्जों से कैथोलिक मूर्तियों और चित्रों को हटा दिया गया।
(5) प्रोटेस्टेंट धर्म के सिद्धान्तों के आधार पर तैयार की गई अनेक पुस्तकों का प्रकाशन कराकर उनका जनता में प्रचार कराया।
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