पुनर्जागरण पर विद्वानों के मत - Scholars' Opinions on Renaissance
पुनर्जागरण पर विद्वानों के मत - Scholars' Opinions on Renaissance
सामान्यतः आधुनिक यूरोप का आरंभ पुनर्जागरण से ही माना जाता है क्योंकि पुनर्जागरण ने यूरोप में विचार करने की स्वतंत्रता, वैज्ञानिक एवं आलोचनात्मक दृष्टि चर्च के प्रभुत्व से कला एवं साहित्य की मुक्ति तथा प्रादेशिक भाषाओं के विकास को संभव बनाया। पुनर्जागरण के सम्बन्ध में प्रमुख इतिहासकारों के मत निम्नलिखित हैं-
फर्ग्यूसन तथा ब्रून ने लिखा है 'पुनर्जागरण का युग महत्वपूर्ण परिवर्तनों का युग था जिसमें बहुत कुछ मध्यकालीन था, कुछ स्पष्टतः आधुनिक था तथा कुछ स्वयं में विशिष्ट था।
इसने मध्य एवं आधुनिक युगों के बीच के रिक्त स्थान को पाट दिया, परन्तु इसके साथ ही यह महान् राजनीतिक, सामाजिक एवं बौद्धिक जागृति का सांस्कृतिक काल था।
राबर्ट इरगैंग के अनुसार, “सांस्कृतिक पुनरूत्थान के द्वारा सामन्तशाही का पतन, प्राचीन साहित्य का अध्ययन, बारूद और छापेखाने का आविष्कार नये मार्गों की खोज, पूँजीवाद का आरंभ इत्यादि कार्य सम्पन्न हुए।“ सीमित रूप में इसका अभिप्राय जिन विशेष सांस्कृतिक परिवर्तनों से हैं,
वे इस प्रकार हैं लौकिक भावना की वृद्धि, सांसारिक वस्तुओं के प्रति रूचि, साहित्य और कला के क्षेत्र में नवीन भावना का विकास आदि।
फिशर के अनुसार, “मानववादी आन्दोलन का आरंभ, धर्म के क्षेत्र में नया दृष्टिकोण, स्थापत्य एवं चित्रकला का नया स्वरूप, व्यक्तिवादी सिद्धान्तों का विकास, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और छापेखाने का आविष्कार इत्यादि विशेषताओं को सामूहिक रूप में सांस्कृतिक नवजागरण' कहते हैं।"
इतिहासकार डेविस के शब्दों में पुनर्जागरण शब्द " मानव के स्वातंत्र प्रिय साहसी विचारों को जो मध्य युग में धर्माधिकारियों द्वारा जकड़ व बन्दी बना दिये गये थे, व्यक्त करता है।" इतिहासकार सीमोण्ड ने लिखा है कि यह एक आन्दोलन था जिसके द्वारा पश्चिम के राष्ट्र मध्य युग से निकल कर आधुनिक विचार तथा जीवन की पद्धतियों को ग्रहण करने लगे।
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