दक्षिण भारतीय साम्राज्य : चोल साम्राज्य (विशेष संदर्भ स्थानीय प्रशासन) - South Indian Empire: Chola Empire (special reference to local administration)
दक्षिण भारतीय साम्राज्य : चोल साम्राज्य (विशेष संदर्भ स्थानीय प्रशासन) - South Indian Empire: Chola Empire (special reference to local administration)
उद्भव
पल्लवों के पतन के पश्चात् लगभग 850 ई. से 1250 ई. तक दक्षिण भारतीय प्रायद्वीप में चोल राजवंश ने शासन किया। इस अवधि में दक्षिण भारत में राजनैतिक एकता की स्थापना हुई तथा चोल राजवंश का साम्राज्यिक शक्ति के रूप में उत्थान हुआ। चोल शासकों का सर्वप्रथम उल्लेख अशोक के अभिलेखों में हुआ है। इनमें इनका उल्लेख चेर एवं पांड्य शासकों के साथ हुआ है जिनके अशोक के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध थे। इसके बाद चोल शासकों का उल्लेख संगम साहित्य में हुआ है। किंतु संगम युग के बाद चोलों का विघटन हो गया और उन्हें विस्मृत कर दिया गया।
चोल नाम की उत्पत्ति के विषय में हमें कोई प्रामाणिक जानकारी नहीं है। एक विद्वान इसे पांड्य और चेर राजवंशों की तरह एक अति प्राचीन और प्रसिद्ध राजवंश का नाम मानते हैं। कुछ इतिहासकारों के अनुसार, चोल शब्द की व्युत्पत्ति तमिल चूल से हुई है, जिसका अर्थ 'मँडराना' होता है। इस आधार पर उनका निष्कर्ष है कि चोल से तात्पर्य 'मँडराने वाला' से है। कुछ इतिहासकार चोल का संबंध तमिल चोलम्' से जोड़ते हैं, जिसका अर्थ 'बाजरा' होता है, तो अन्य इसे संस्कृत 'चोर' से संबद्ध करते हैं। कर्नल जेरिनि चोल का संबंध कोल' से जोड़ते हैं, जिससे दक्षिण भारत में आर्यों के पूर्व निवास करने वाली श्याम वर्ण की एक जाति का बोध होता था। नीलकंठ शास्त्री का मत है कि इस नाम की उत्पत्ति चाहे जैसे भी हुई हो, इतना सत्य है कि अति प्राचीन काल से चोल शब्द से चोलवंश द्वारा शासित देश और प्रजा दोनों का अर्थ ग्रहण किया जाता रहा है।
वार्तालाप में शामिल हों