प्रथम विश्व युद्ध का प्रारंभ - Start of World War I

प्रथम विश्व युद्ध का प्रारंभ - Start of World War I


28 जुलाई. 1914 ई. को आस्ट्रिया के सर्बिया पर आक्रमण के साथ ही प्रथम विश्व युद्ध आरंभ हो गया। 1 अगस्त, 1914 ई. को जर्मनी ने रूस के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी। 3 अगस्त, 1914 ई. को जर्मनी ने फ्रांस के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी। 4 अगस्त, 1914 ई. को इंग्लैंड ने जर्मनी के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी। 4 अगस्त, 1914 ई. को ही अमेरिकी राष्ट्रपति वुडरो विल्सन ने तटस्थ रहने की घोषणा की। 6 अप्रैल, 1917 ई. को अंततः अमेरिका ने भी मित्र राष्ट्रों के पक्ष में प्रथम विश्व युद्ध में प्रवेश किया।


इस प्रकार 28 जुलाई, 1914 को प्रथम विश्वयुद्ध आरंभ हो गया। एक के बाद एक देश इस युद्ध में शामिल होते चले गए। प्रारंभिक दौर में जर्मनी एवं उसके साथियों ने मित्र राष्ट्रों को कई मोर्चों पर शिकस्त दी। अमेरिका के युद्ध में प्रविष्ट होते ही पासा पलट गया। मित्र राष्ट्र विजयी होते चले गए, जर्मनी एवं उसके साथी परास्त हुए युद्ध का विस्तृत घटनाक्रम इस प्रकार था।


प्रथम विश्वयुद्ध का घटनाक्रम


आस्ट्रिया के सर्बिया के विरुद्ध युद्ध की घोषणा करते ही क्रमशः एक के बाद एक देश प्रथम महायुद्ध में शामिल होते चले गए।

वस्तुतः पूर्व की संधियों के कारण ये देश एक दूसरे से वचनबद्ध थे किसी एक देश के युद्ध में शामिल होने पर दूसरे मित्र को पूर्व संधि के तहत युद्ध में प्रवेश करना ही था। युद्ध के पूर्व ही विश्व 2 भागों में विभाजित था। प्रथम गुट त्रिगुट था जिसका नेता जर्मनी था। अतः इस गुट को हम घटनाक्रम के दौरान केंद्रीय शक्तियाँ (Central Power) कह कर संबोधित करेंगे।


दूसरे गुट में इंग्लैंड - फ्रांस एवं रूस थे। अतः इन्हें हम मित्रराष्ट्र कहकर संबोधित करेंगे।


28 जुलाई, 1914 को आस्ट्रिया ने सर्बिया के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी।

29 जुलाई, 1914 को सोजोनोव और सैनिक गुट ने जार से आस्ट्रिया एवं जर्मनी के विरुद्ध सेना के कूच करने के आदेश पर हस्ताक्षर का आग्रह किया। 30 जुलाई, 1914 को जार निकोलस ने सेना के लामबंदी के आदेश जारी कर दिए। जार की कार्यवाही से स्थिति जटिल हो गई। जार के आदेश के क्रियान्वयन का समाचार मिलते ही जर्मनी के केसर विलियम ने रूस को 12 घंटे में सेना लामबंदी रोकने की चेतावनी दी। 3 अगस्त, 1914 को जर्मनी ने फ्रांस के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी।


त्रिगुट के दो सदस्य जर्मनी एवं आस्ट्रिया व्यापक युद्ध में सम्मिलित हो गए थे। इंग्लैंड का भी युद्ध से अलग रहना संभव नहीं था।

यथार्थ में 29 जुलाई, 1914 को सर एडवर्ड ग्रे ने जर्मनी के राजदूत को मैत्रीपूर्ण एवं व्यक्तिगत चेतावनी दी थी कि यदि बेल्जियम को युद्ध में खींचा जाता है तो इंग्लैंड भी युद्ध में प्रवेश करेगा। लेकिन जर्मनी द्वारा बेल्जियम पर आक्रमण करने से ब्रिटेन को म्यान से तलवार निकालने का अवसर मिल गया। सन 1839 में ब्रिटेन ने अन्य महाशक्तियों के साथ बेल्जियम की तटस्थता सुनिश्चित करने की संधि की थी। 4 अगस्त, 1914 को जर्मनी को बेल्जियम की तटस्थता का सम्मान करने के लिए अंतिम चेतावनी दी गई। जर्मनी का कोई उत्तर न मिलने पर जर्मनी तथा ब्रिटेन परस्पर शत्रु बन गए।


जर्मनी का आक्रमण


जर्मनी ने बेल्जियम पर आक्रमण कर दिया। लीग और नमूर में बेल्जियम की सेना परास्त हो गई।

जर्मनी की सेना फ्रांस तथा ब्रिटेन की सेना को पीछे हटाते हुए फ्रांस बेल्जियम सीमा की ओर आगे बढ़ी, मित्र राष्ट्रों की सेना हट गई और केंद्रीय शक्तियों का प्रभुत्व हो गया। इसी अवधि में फ्रांस ने अल्साम एवं लौरेन पर असफल आक्रमण किया। जर्मन सेना पेरिस की ओर बढ़ती हुई मार्ने (Marne) नदी से आगे पहुँच गई। मित्र राष्ट्रों के लिए स्थिति अत्यंत जटिल हो गई थी, लेकिन जनरल फॉच के नेतृत्व में सेना ने जर्मन सेनाओं को अस्त-व्यस्त कर भारी हानि पहुँचाई। जनरल फॉच ने ब्रिटिश सेना की सहायता से • अवसर का लाभ उठाते हुए जर्मन सेना को मार्ने नदी से एथने नदी की उत्तर दिशा में वापस जाने के लिए


बाध्य कर दिया।

अब जर्मन सेना ने एशने नदी के तट पर पड़ाव डाला तथा फ्रांसीसी सेना के समस्त आक्रमणों को असफल कर दिया। तदुपरांत दोनों देशों की सेना ने स्विटजरलैंड से उत्तरी सागर तक के विस्तृत क्षेत्र में 4 वर्षो तक भीषण युद्ध किया।


पूर्वी मोर्चा


रूसी सेना ने पूर्वी प्रशा पर आक्रमण किया लेकिन तन्नाबर्ग के स्थान पर हिन्डेन वर्ग ने रूसी सेना को पराजित किया और जर्मनी की सीमा से बाहर निकाल दिया। रूस की सेना को आस्ट्रिया के विरुद्ध अपेक्षाकृत अधिक सफलता मिली थी। रूस ने गैलेसिया को ध्वस्त किया।

बाद में जर्मनी ने रूसी सेना को गैलेसिया से खदेड़ दिया और वारसा पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित कर लिया। इटली त्रिराष्ट्र संधि द्वारा जर्मनी से बँधा हुआ था। मगर वह श्रृंगाल नीति का परिचय देते हुए 1915 ई. में मित्र राष्ट्रों के गुट में शामिल हो गया। वह आस्ट्रिया से अपने छीने हुए प्रदेश पुनः प्राप्त करना चाहता था ।


डार्डेनल्स में युद्ध


जर्मनी तुर्की को मित्र राष्ट्रों के विरुद्ध युद्ध में शामिल करना चाहता था। तुर्की ने डार्डेनल्स पर आधिपत्य कर रूस एवं मित्र राष्ट्रों के बीच संचार प्रणाली ठप्प कर दी।

इस स्थिति में इंग्लैंड एवं द्रासे ने संयुक्त रूप से डार्डेनल्स पर नियंत्रण करने का असफल प्रयास किया। गैलीपोली (Gallipoli) प्रायद्वीप में ब्रिटिश को करारी हार का सामना करना पड़ा। 1915 में जर्मनी आस्ट्रिया ने सर्बिया को पूर्णतः परास्त किया। टाउनशैड के नेतृत्व में ब्रिटिश सेना को तुर्की के समक्ष आत्म समर्पण हेतु बाध्य होना पड़ा। परंतु बाद में जनरल मॉड ने तुर्कों से बगदाद प्राप्त कर लिया। 1915 का वर्ष मित्र राष्ट्रों के लिए हानिकारक रहा।


वर्ष 1916


1916 ई. में जर्मनी ने फ्रांस पर तीव्र गति से आक्रमण किया। बाद में फ्रांस एवं इंग्लैंड ने संयुक्त रूप से जर्मनी पर आक्रमण किया।


नौसैनिक युद्ध


नौसैनिक युद्ध में ब्रिटिश सेना को अधिक सफलता मिली। जर्मनी उसकी नौसेना का मुकाबला न कर सका। इसी कारण उसने यू वोट पनडुब्बी द्वारा जहाज डुबाने की नीति अपनाई ।


वर्ष 1917 की गतिविधियाँ


वर्ष 1917 में दो महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए- (1) अमेरिका का 2 अप्रैल, 1917 में युद्ध में प्रवेश । (2) 1917 की रूसी क्रांति।


जार के अपदस्थ होने पर सत्ता वोल्शेविक दल के हाथों में आ गई। इन्होंने युद्ध विराम संधि पर हस्ताक्षर किए।


ब्रेस्ट लिटोवस्क की संधि (3 मार्च 1918)


इस संधि द्वारा रूस युद्ध से पृथक हो गया। रूस ने जर्मनी को पोलैंड एवं वाल्टिक प्रांतों सहित समग्र पश्चिमी प्रांत दे दिए। इस प्रकार जर्मनी ने अपनी पूरी सेना पश्चिमी मोर्चे पर स्थानांतरित कर दी। मित्र राष्ट्रों के साथ से रूस हट गया मगर इससे पहले ही अमेरिका युद्ध में प्रवेश कर चुका था इससे मित्र राष्ट्रों की स्थिति सुदृढ़ हुई।


वर्ष 1918 की गतिविधियाँ


अमेरिकी राष्ट्रपति बुडरो विल्सन ने अपनी 14 सूत्रीय शांति योजना जारी की।

14 सूत्रीय कार्यक्रम की लाखों प्रतियाँ जर्मनी एवं सहयोगी देशों में बाँटी गई।


अप्रैल, 1918 मित्र राष्ट्रों की संयुक्त कमान मार्शल फॉच (Marshall Foch) ने संभाली। सितंबर 1918 तक केंद्रीय शक्तियाँ परास्त होती चली गई। जर्मनी के सहयोगी एक के बाद एक परास्त होते गए। अब युद्ध के मोर्चे पर जर्मनी अकेला खड़ा था।


9 नवंबर, 1918 को जर्मनी में समाजवादी क्रांति हो गई। कैसर विलियम द्वितीय सत्ता त्यागकर हालैंड चला गया। समाजवादी दल के नेता फ्रेडरिक एवर्ट ने गणतंत्र की घोषणा की।


11 नवंबर, 1918 को प्रातः 5 बजे जर्मनी एवं मित्र राष्ट्रों के मध्य शांति संधि पर हस्ताक्षर हुए।


इस प्रकार प्रथम विश्वयुद्ध समाप्त हो गया।