नारी की स्थिति - status of woman

नारी की स्थिति - status of woman


पूर्व मध्ययुग में नारियों को वे सभी सुविधायें न प्राप्त थीं, जो उन्हें उसके पूर्ववर्ती काल में प्राप्त थीं। फिर भी उनकी दशा साधारणतः अच्छी थी। कुछ प्रतिबंधों का प्रचार प्रारंभ हो गया था। बाल विवाह की प्रथा चल पड़ी थी। इसकी पुष्टि अल्बरूनी से भी होती है। उसका कथन है कि छोटी आयु होने के कारण वैवाहिक संबंध बच्चों के पिता तथा अभिभावक तय करते थे। कोई ब्राह्मण द्वादश वर्ष से अधिक आयु वाली कन्या से विवाह न कर सकता था।


कन्या की अपेक्षा पुत्र जन्म को अधिक महत्व दिया जाता था। 'विद्धशालभंजिका में वर्णन है कि लाट देश के राजा चन्द्रवर्मा ने अपनी पुत्री मृगांकवली को मृगांकवर्मा के नाम से प्रसिद्ध किया क्योंकि उससे कोई पुत्र न था तथा पुत्री ही राज्य की उत्तराधिकारी थी। परिवार में इनकी उच्च स्थिति का परिचय पूर्व मध्यकाल के अभिलेखों में मिलता है। अहार अभिलेख में भट्टनी महादेवी का परिचय उसकी स्थिति का परिचय देता है। प्रशासन चलाने में प्रतीहार रानी महादेवी सहायता देती थी। उसे अग्रहार दान देने का पूरा अधिकार था। अल्पवयस्क राजा की संरक्षिका के रूप में वह प्रशासन संभालती थी।


स्त्रियों को शिक्षा अर्जन का पूर्ण अधिकार था। राजशेखर की पत्नी अवन्तिसुंदरी एक प्रसिद्ध कवियित्री थी। मारूला, मोरिका तथा सुभद्रा इस काल की प्रमुख विदुशी महिलाएँ थीं। शिक्षा के अतिरिक्त ललितकलाओं का भी स्त्रियों को ज्ञान कराया जाता था परंतु सामान्यतः स्त्रियों में शिक्षा का प्रसार अल्प था। समस्त समाज में लगभग 10 प्रतिशत स्त्रियाँ ही शिक्षित थीं। स्त्रियाँ शास्त्रों में भी रुचि रखती थीं। देवदासी और वैश्यावृत्ति का भी समाज में प्रचलन था। इनके विकास में राजा और धनी व्यक्तियों का प्रमुख हाथ था।