राजेंद्र प्रथम के उत्तराधिकारी - दक्षिण भारतीय साम्राज्य : चोल साम्राज्य - Successors of Rajendra I - South Indian Empire: Chola Empire

राजेंद्र प्रथम के उत्तराधिकारी - दक्षिण भारतीय साम्राज्य : चोल साम्राज्य - Successors of Rajendra I - South Indian Empire: Chola Empire


राजेंद्र प्रथम का उत्तराधिकारी राजाधिराज - प्रथम ( 1044-52 ई.) था। राजाधिराज - प्रथम के शासनकाल की एक महत्वपूर्ण सैन्य उपलब्धि पांड्य एवं चेरों पर उसकी विजय थी, जिन्होंने लंका के राजा विक्रमबाहु प्रथम के साथ मिलकर उसके विरुद्ध विद्रोह कर दिया था। इतिहासकारों का मत है कि अपने इन विरोधियों पर विजय के उपलक्ष्य में ही उसने अश्वमेघ यज्ञ का आयोजन किया। किसी चोल 'शासक द्वारा कोई वैदिक यज्ञ संपन्न किए जाने का यह अकेला उदाहरण है।


राजाधिराज-प्रथम ने कल्याणी के चालुक्य राजा सोमेश्वर-प्रथम को दो बार पराजित किया। एक बार तो वह आक्रमण करता हुआ कल्याणी तक जा पहुँचा, जहाँ उसने वीराभिषेक (विजयी राजा का (अभिषेक) समारोह का आयोजन किया और 'विजय राजेंद्र' की उपाधि धारण की। अपने शासनकाल के अंत में राजाधिराज- प्रथम ने एक बार फिर सोमेश्वर-प्रथम पर आक्रमण किया। किंतु इस बार कोप्पम के युद्ध में वह मारा गया। इस युद्ध में चोलों की सेना लगभग हार के कगार पर ही थी। पर राजाधिराज- प्रथम के अनुज राजेंद्र द्वितीय ने, जो इस युद्ध में राजाधिराज- प्रथम के साथ था, अपने युद्ध कौशल से इस पराजय को अंततः विजय में परिवर्तित कर दिया और एक बार फिर सोमेश्वर-प्रथम की पराजय हुई।


राजाधिराज - प्रथम का उत्तराधिकारी राजेंद्र-द्वितीय ( 1052-63 ई.) था। कोप्पम के युद्ध मैदान में ही उसका राज्याभिषेक किया गया था। उसके शासनकाल में भी चोल-चालुक्य संघर्ष जारी रहा। चोल अभिलेखों के अनुसार राजेंद्र-द्वितीय चालुक्यों पर आक्रमण करता हुआ कोल्हापुर तक जा पहुंचा था, जहाँ उसने एक जयस्तंभ की स्थापना की थी। किंतु विक्रमांकदेवचरित के लेखक बिल्हण के अनुसार सोमेश्वर-प्रथम ने कांची को ध्वस्त कर दिया था। संभवतः दोनों में से किसी ने भी कोई स्थायी विजय प्राप्त नहीं की।


राजेंद्र द्वितीय का उत्तराधिकारी वीर राजेंद्र (1063-70 ई.) था। उसके समय में भी चालुक्यों के साथ चोलों की पारंपरिक प्रतिद्वंद्विता जारी रही। उसने कृष्णा एवं तुंगभद्रा के संगम पर कुदाल संगम के युद्ध में सोमेश्वर को पराजित किया। वीर राजेंद्र का उत्तराधिकारी अधिराजेंद्र था, जिसने कुछ महीने ही शासन किया। एक जनविद्रोह में उसकी हत्या कर दी गई।