भारतेन्दु का 'निजभाषा प्रेम' - Bhartendu's 'love of own language'
भारतेन्दु का 'निजभाषा प्रेम' - Bhartendu's 'love of own language'
भारतेन्दु के लिए भाषा केवल साहित्य-सृजन का माध्यम नहीं थी अपितु वह राष्ट्रीय और सांस्कृतिक अस्मिता का प्रतीक थी। भारतेन्दु ने 'निजभाषा' अर्थात् हिन्दी की उन्नति पर बहुत जोर दिया। इसका एक कारण यह है कि 'निजभाषा' में राष्ट्रीय एकता का बोध है और वह जनता को एक साथ जोड़ने के लिए आवश्यक है। आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी ने इस सन्दर्भ में लिखा है कि "भाषा के प्रति इस प्रकार की जागरूकता के क्रियात्मक रूप का कारण तो राष्ट्रीय भावना थी, किन्तु प्रतिक्रियात्मक रूप के हेतु था हिन्दी की भयंकर उपेक्षा । " " यह सच है कि अंग्रेजी सरकार ने हिन्दी की उपेक्षा की और हिन्दी और उर्दू का विवाद जानबूझ कर खड़ा किया।
ऐसे में भारतेन्दु ने हिन्दी-उर्दू के विवाद को अपने 'निजभाषा' के हथियार से निष्प्रभ करने की कोशिश की। ये दोनों ही बाते एक दूसरे को पुष्ट करती हैं। वस्तुतः भारतेन्दु निजभाषा की उन्नति को सर्वदेशीय उन्नति का मूल मानते हैं -
निजभाषा उन्नति अहै सब उन्नति को मूल । बिनु निजभाषा ज्ञान के मिटत न हिय को सूल || 20
भारतेन्दु का यह प्रबल विश्वास था कि भाषा द्वारा ही एकता स्थापित की जा सकती है तथा एकता का अभाव ही स्वार्थ और दुःख का कारण है
इसलिए दुःखों से पार पाने के लिए उन्होंने सभी से मिलकर ज्ञान सम्पादन का आग्रह किया। हिन्दी की उन्नति पर व्याख्या के अन्त में वे निवेदन करते हैं कि-
करहु बिलम्ब न भ्रात अब उठहु मिटावहु सूल। निजभाषा उन्नति करहु प्रथम जो सबको मूल ॥"
ध्यातव्य है कि भारतेन्दु अंग्रेजी शिक्षा के पक्षधर थे। उनका मत है कि अंग्रेजी से नये ज्ञान-विज्ञान और तकनीक में पारंगत भले ही हो जाएँ लेकिन जब तक अपनी भाषा का ज्ञान नहीं होगा तब हम हीनता-बोध से ग्रस्त रहेंगे-
अंग्रेजी पढ़ि के जदपि सब गुन होत प्रवीन । पै निजभाषा ज्ञान बिन रहत हीन के हीन ॥ 22
स्पष्ट है कि भारतेन्दु का 'निजभाषा' प्रेम राष्ट्र-प्रेम की भावना का पोषक है। वह भारतीयों में अस्मिताबोध और स्वाभिमान की भावना जगाने का उपकरण है। वह स्वावलम्बन की चेतना का बोधक है। साथ ही अंग्रेजी शिक्षा का आग्रह उनके वैचारिक व्यापकता और खुलेपन को प्रकट करता है। वे ज्ञान-विज्ञान के समस्त साधनों को देखना-समझना चाहते हैं किन्तु अपनी राष्ट्रीय सांस्कृतिक अस्मिता को बचाए-बनाए रखकर ।
वार्तालाप में शामिल हों