लोक-साहित्य की विशेषताएँ - characteristics of folklore

लोक-साहित्य की विशेषताएँ - characteristics of folklore


1. रचयिता अज्ञात होता है।


2. मौखिक परम्परा होती है और पीढ़ी परम्परा से सुरक्षित होती है। 3. भाषा लोक भाषा होती है। वह सहज एवं अकृत्रिम होती है। वह किसी भाषा-सिद्धान्त के अन्तर्गत नहीं


बँधती ।


4. लोक रचनाकार का व्यक्तित्व लोक में समाहित हो जाता है।


5. लोकानुभूतियों का संग्रह होता है। जैसे लोकजीवन की अनुभूतियाँ, दुःख-सुख, लोकविश्वास, रीति- रिवाज की अभिव्यक्ति आदि ।


6. लोक-साहित्य में आंचलिकता की झलक विद्यमान रहती है।


शिष्ट साहित्य की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-


1. रचनाकार ज्ञात होता है।


2. लिखित होता है, वंश परम्परा नहीं होती।


3. भाषा व्याकरणसम्मत, सुसंस्कृत और परिनिष्ठित होती है। साहित्यशास्त्रों का पालन होता है। 4. रचनाकार का व्यक्तित्व मिला रहता है। उसका नाम होता है।


5. शिष्ट साहित्य लोक मानस, सुसंस्कृत परिष्कृत अनुभूतियों को ग्रहण करता है और साहित्यकार के साँचे में ढलता है।


6. शिष्ट साहित्य की आंचलिकता भी सार्वभौम बन जाती है।