लोकोक्तियों का वर्गीकरण - classification of proverbs
लोकोक्तियों का वर्गीकरण - classification of proverbs
लोकोक्तियाँ मानव जीवन के अनुभूत सत्य पर आधारित होती हैं। ये लोकजीवन के प्रत्येक पहलू को अपने में समाहित किये हुए वे संक्षिप्त कथन हैं जो अलग-अलग उद्देश्यों की पूर्ति के लिए जनसाधारण द्वारा प्रयुक्त किये जाते हैं। कहीं इनका उद्देश्य प्रयोगकर्ता के कथन की पुष्टि होता है तो कहीं नैतिक शिक्षा या लोक-व्यवहार की शिक्षा देने के लिए इनका प्रयोग किया जाता है। कहीं इनका प्रयोग कटाक्ष के लिए किया जाता है तो कहीं श्रोता को सचेत करने के लिए। लोकोक्तियों के विषय, उद्देश्यादि को महत्त्व देते हुए विद्वानों ने इन्हें वर्गीकृत करने का प्रयास किया है। प्रमुख विद्वानों द्वारा किये गए लोकोक्तियों के वर्गीकरण इस प्रकार हैं-
डॉ. कन्हैयालाल सहल का वर्गीकरण-
1. ऐतिहासिक कहा
2. स्थान सम्बन्धी कहावतें
3. समाज-चित्रण सम्बन्धी कहावतें
4. शिक्षा-ज्ञान और साहित्यिक कहावतें
5. धर्म और जीवन-दर्शन सम्बन्धी कहावतें
6. कृषि सम्बन्धी कहावतें
7. वर्षा सम्बन्धी कहावतें
8. प्रकीर्ण कहावतें
डॉ. शंकरलाल यादव का वर्गीकरण-
1. जातिपरक
2. देश या स्थानपरक
3. इतिहासपरक
4. कृषिपर
5. नीतिगर्भित
6. व्यंग्यात्मक
डॉ. कृष्णदेव उपाध्याय का वर्गीकरण -
1. स्थान सम्बन्धी लोकोक्तियाँ
2. जाति सम्बन्धी लोकोक्तियाँ
3. प्रकृति तथा कृषि सम्बन्धी लोकोक्तियाँ
4. पशु-पक्षी सम्बन्धी लोकोक्तियाँ
5. प्रकीर्ण लोकोक्तियाँ
यद्यपि विद्वानों ने लोकोक्तियों का वर्गीकृत करने का प्रयास किया है किन्तु यह वर्गीकरण वैज्ञानिक पद्धति
पर आधारित नहीं है। एक ही लोकोक्ति में एक से अधिक सम्बद्ध विषय या उद्देश्य पाए जा सकते हैं तब वह लोकोक्ति वर्ग विशेष में नहीं वरन् एक से अधिक वर्गों में स्वीकार्य होगी। इस प्रकार लोकोक्ति का वर्गीकरण उसे वर्ग के बाँटने के लिए नहीं वरन् उनके अध्ययन को सुगम बनाने का प्रयास भर है।
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