लोक-गीतों में निरूपित संस्कृति - culture represented in folk songs
लोक-गीतों में निरूपित संस्कृति - culture represented in folk songs
संस्कृति एक बृहत् शब्द है जो स्वयं में जीवन के इन्द्रधनुषी रंगों को समाहित किए दृष्टिगोचर होती है तथा इन रंगों को परम्परा से पुष्ट भी रखती है। लोक-गीतों ने सभी संस्कारों (गर्भाधान से लेकर जन्म-मरण, विवाह, जनेऊ, मुंडन) को अपने विस्तृत कलेवर में समेट रखा है तो तीज-त्योहारों, मेलों, उत्सवों के गीत हमारी सांस्कृतिक विरासत को अपने आँचल में सहेजे हुए इसकी रक्षा करते हैं। भारत एक धर्म प्राण देश है। हमारी धार्मिक आस्थाएँ, विश्वास, दर्शन सभी इन गीतों में निवास करते हैं। हमारे पारिवारिक रिश्ते भारतीय संस्कृति का प्रत्यक्ष उदाहरण हैं जो विश्व भर में अपनी एक निराली छवि रखते हैं।
इन रिश्तों-नातों माता-पिता, भाई-भाभी, ननद- सलहज, नाती-पोते, बहू-बेटी इत्यादि सम्बन्धों हेतु की गई भावाभिव्यक्ति इन गीतों में सुरक्षित हैं । भारतीय संस्कृति प्रारम्भ से ही वीरों और वीर भावमयी रही है। वीरों और उनकी वीरता को ये गीत बड़ी कुशलता से आँखों के आगे चित्रित कर वीरत्वपूर्ण संस्कृति से परिचय कराते हैं। सारांशतः कहा जा सकता है कि इन लोक-गीतों में जनजीवन, धर्म, दर्शन, भक्ति-नीति व कला के रूप में संस्कृति के जीवन्त दर्शन होते हैं।
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