लोक कथा की परिभाषा - Definition of Folktale
लोक कथा की परिभाषा - Definition of Folktale
'कथा' शब्द संस्कृत की 'कथ्' धातु से उत्पन्न है, जिसका सामान्य अर्थ है, 'जो कहा जाए'। किन्तु यह अर्थ कथा के लिए प्रयुक्त नहीं किया जा सकता है क्योंकि कथा से तात्पर्य किसी ऐसी घटना को कहने से है जो एक निश्चित क्रम और उद्देश्य को लेकर कही जाए। यहाँ कहने वाले के साथ श्रोता की उपस्थिति भी अनिवार्य है। क्योंकि कहने की सार्थकता उसके सुनने से होती है। अतः यह कह सकते हैं कि लोक-साहित्य की महत्त्वपूर्ण विधा लोक कथा मानव की भावनाओं, रीति-रिवाजों, विचारों और धारणाओं का मौखिक और सशक्त माध्यम है जिसमें जीवन के यथार्थ और आदर्श का सुन्दर समन्वय होता है।
ये श्रोता के हृदय में जिज्ञासा जगाती हैं और फिर उन जिज्ञासाओं को शान्त भी करती हैं। लोक-कथाएँ कुछ निश्चित कथानक रूढ़ियों और शैलियों में ढली होती हैं जो विभिन्न सन्दर्भों और अंचलों में विविध रूप ग्रहण कर हमें मौखिक परम्परा से वसीयत के रूप में प्राप्त होती है। लोक कथा के अर्थ और स्वरूप को और अधिक स्पष्ट करने के लिए कुछ परिभाषाएं द्रष्टव्य हैं-
"लोक कथा शब्द मोटे तौर पर लोक प्रचलित उन कथानकों के लिए व्यवहृत होता है,
जो मौखिक या लिखित परम्परा से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को प्राप्त होते रहते हैं।"
- डॉ. हजारीप्रसाद द्विवेदी
"लोकभाषा के माध्यम से सामान्य लोकजीवन में प्रचलित विश्वास, आस्था और परम्परा पर आधारित कथाएँ लोक कथा के अन्तर्गत आती हैं। इससे मानव का पर्याप्त आमोद-प्रमोद होता है। आये दिन की कथाएँ लोक कथा के अन्तर्गत आती हैं।"
- डॉ. विद्या चौहान
"जो कथावस्तु और कलात्मक कथन प्रणाली एक साहित्यिक सौन्दर्य प्राप्त कर लेती है, लोक कथा कही जाती है।
लोक कथा विश्वव्याप्त है। इसमें लोकजीवन नाना रूपों में प्रकट होता चला आ रहा है। मानव के दुःख- सुख, रीति-रिवाज, आस्थाएँ एवं विश्वास इन लोक कथाओं में अभिव्यक्त होते रहते हैं। लोक कथा मौखिक रूप में ही प्राप्त है।"
- डॉ. कुन्दनलाल उप्रेती
"मानव के सुख-दुःख, प्रीति-शृंगार, वीर भाव और बैर इन सबने खाद बनकर लोक-कथाओं को पुष्ट किया है। रहन-सहन, रीति-रिवाज,
धार्मिक विश्वास, पूजा-उपासना आदि इन सबसे कहानी का ठाट बनता और बदलता रहता है। कहानी मनुष्य के लिए अपूर्व विश्रान्ति का साधन है। मन के आयास को हटाने के लिए कहानी मानव समाज का प्राचीन रसायन है।"
- डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल
उक्त परिभाषाओं के आधार पर कहा जा सकता है कि वे कथाएँ जो जन-मानस के जीवन से जुड़ी हुई हैं। और प्राचीनकाल से मौखिक परम्परा के रूप में विभिन्न परिवर्तनों और परिवर्द्धनों के साथ वर्तमान रूप में प्राप्त होती हैं, लोक-कथाएँ हैं।
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