हिन्दी की जनपदीय बोली - अवधी - District dialect of Hindi - Awadhi

हिन्दी की जनपदीय बोली - अवधी - District dialect of Hindi - Awadhi


पौराणिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण अवध प्रदेश 'कोसल' और 'साकेत' के नाम से भी जाना जाता है। अवध प्रदेश में बोली जाने वाली भाषा को अवधी के नाम से जाना गया। अवधी पूर्वी हिन्दी की अत्यन्त महत्त्वपूर्ण बोली है। अवधी को बोलने का क्षेत्र अवध के साथ-साथ हरदोई, खिरी, फैजाबाद के कुछ भाग के अलावा फतेहपुर, इलाहाबाद, कैराकत और जौनपुर तथा मिर्जापुर का पश्चिमी भाग भी है। इसे कौसली भी कहते हैं। इसका सम्बन्ध कोशल राज्य से है। अवधी के स्थान पर बैसवाड़ी नाम भी व्यवहृत है।

बैस राजपूतों की प्रधानता के कारण उन्नाव, लखनऊ, रायबरेली, फतेहपुर के कुछ भाग में बैसवाड़ी बोली जाती है। अवधी की अपेक्षा बैसवाड़ी थोड़ी कर्णकटु है। अवधी की भाषागत सीमाओं की दृष्टि से इसके पश्चिम में पश्चिमी हिन्दी, कन्नौजी, बुंदेली है और पूर्व में भोजपुरी है। अवधी में 'श' और 'ष' नहीं है। यहाँ मात्र 'स' का प्रयोग होता है। श्वास के स्थान पर साँस, षोड्स के स्थान पर सोलह, 'ऋ' के स्थान पर 'री', 'ऋषि' के स्थान पर 'रिसि', 'ल' के स्थान पर 'र', 'अंजुलि' के स्थान पर अजुरि' आदि। अवधी का संस्कारगीत कर्णप्रिय एवं हृदयस्पर्शी है। कवि सुमेरु गोस्वामी तुलसीदास की काव्यभाषा अवधी है।