हिन्दी की जनपदीय बोली - छत्तीसगड़ी - District dialect of Hindi - Chhattisgarhi

हिन्दी की जनपदीय बोली - छत्तीसगड़ी - District dialect of Hindi - Chhattisgarhi


चंदवंशी राजाओं के गढ़ के कारण इस भूखण्ड को चंदीशाद कहा जाता था। बालाघाट के कुछ भागों में यह बोली जाती है। यहाँ इसे 'खलोटी' भाषा भी कहते हैं। छत्तीसगढ़ के मैदानी भाग के पूर्व में पूर्वी संभलपुर का उड़ीसा प्रदेश है। यहाँ के लोग इसे 'लरिया' नाम से पुकारते हैं। छत्तीसगढ़ के इतिहास का अवलोकन करने पर पता चलता है कि इसका सम्बन्ध पौराणिक और ऐतिहासिकता से है। पौराणिक काल में यहाँ का अधिकांश भाग दण्डकारण्य के नाम से प्रचलित था। कालान्तर में इसके कुछ हिस्से को महाकोसल और कुछ को कोसल नाम से जाना जाने लगा।

इसके बाद भी छत्तीसगढ़ का नामोल्लेख यहाँ नहीं मिलता। लेकिन नाम के सम्बन्ध में कहा जाता है कि किसी समय यहाँ 36 गढ़ हुआ करते थे। इसी का आधार लेते हुए इस प्रदेश को छत्तीसगढ़ कहा गया, ऐसी आम मान्यता है। छत्तीसगढ़ी बोली का मुख्य क्षेत्र ही आज का छत्तीसगढ़ राज्य है, अतः यहाँ बोली जाने वाली भाषा छत्तीसगढ़ी के नाम से जानी गई। भाषाविज्ञान में अर्द्धमागधी अपभ्रंश के दक्षिणी रूप से उपजी छत्तीसगढ़ी का क्षेत्र बिलासपुर, रायगढ़, खैरागढ़, रायपुर, दुर्ग, राजनांदगाँव, कांकेर आदि हैं।