लोकोत्सव की लोकप्रियता के कारण - Due to the popularity of Lokotsav

लोकोत्सव की लोकप्रियता के कारण - Due to the popularity of Lokotsav


1. भारतीय लोक मानस का आस्थावान व धर्म-प्रिय होना इन लोकोत्सवों की लोकप्रियता का सबसे बड़ा व महत्त्वपूर्ण कारण है।


2. लोकोत्सव आपसी मेल-जोल का बहुत बड़ा साधन है। मानव सामाजिक प्राणी है अतः लोकोत्सवों के बहाने होने वाला यह मेल-जोल मन को भाता है। यह कारण इनकी लोकप्रियता को बढ़ाता है।


3. प्रतिदिन की दिनचर्या से हटकर ये अवसर रोचकता का संचरण करते हैं। इनकी यही रोचकता लोगों को


अपनी ओर आकर्षित करती है।


4. मेलों के अवसर पर लगने वाले हाट-बाजार, रंग-बिरंगी दुकानें, खेल-खिलौना, खाने-पीने की सामग्री, लोगों के आकर्षण का केन्द्र होती है। ये सभी लोगों को अपनी ओर खींचती हैं।


5. ये त्योहार अादि उत्सव प्रतिवर्ष भाई-बहन (रक्षावन्धन), पति-पत्नी (करवायीच तीज माता-पुत्र (वच्छ-बारस) ननद-भाभी आदि रिश्तों को प्रेम की नूतन व प्रगाढ़ डोर में बाँधते हैं।


6. प्रत्येक उत्सव को मनाने के कुछ नियत विधि-विधान होते हैं।

अलग-अलग उत्सवों के अलग-अलग विधि-विधान बहुत रुचिकर लगते हैं तथा ये जीवन की एकरसता को समाप्त कर सरसता का संचार करते हैं। मानव मन सदा ही सरसता के वरण हेतु उत्साही रहा है।


7. मेलों आदि उत्सवों में कलाओं का निदर्शन-प्रदर्शन आवश्यक रूप से देखा जा सकता है। जैसे- मिट्टी के बर्तन, लोक प्रचलित खिलौने, मौत का कुआँ या स्वयं को आग लगाते हुए ऊँचाई से पानी में कूदना आदि । इस प्रकार हर आम आदमी अपनी कला का प्रदर्शन यहाँ कर सकता है। यह भी इनकी लोकप्रियता का एक बड़ा कारण है।