लाल बहादुर शास्त्री का युग और भारतीय डायस्पोरा नीति - The Era of Lal Bahadur Shastri and Indian Diaspora Policy

लाल बहादुर शास्त्री का युग और भारतीय डायस्पोरा नीति - The Era of Lal Bahadur Shastri and Indian Diaspora Policy


नेहरू के बाद लाल बहादुर शास्त्री जब भारत के प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने अपने शासनकाल में डायस्पोरा नीति में नीतिगत बदलाव किए थे। लाल बहादुर शास्त्री जी के समय में श्रीलंका में भारतीय तमिल प्रवासियों की समस्या जो नेहरु काल के समय से चल रही थी उस समस्या ने और उग्र रूप धारण किया था।


शास्त्री श्रीलंका में तमिलों के प्रश्नों को हल करने के लिए प्रधानमंत्री सिरिमावो भंडारनायकेके साथ 29 अक्टूबर, 1964 को एक समझौते की पहलकी । इस समझौते के अनुसार,

9 लाख 75 हजार राज्यविहीन तमिल लोगों में से 3 लाख लोगों को नागरिकता दी जाएगी। 5 लाख 25 हजार लोगों को अपने स्वाभाविक विकसित भारतीय परिवारों के साथ भारतीय नागरिकता प्रदान की जाएगी और डेढ़ लाख लोगों का निर्णय भविष्य में होने वाले समझौतों पर निर्भर करेगा। भारत में नागरिकता प्राप्त व्यक्ति धीरे-धीरे पंद्रह वर्षो में किस्तों में भारत आएँगे।


इस समझौते के बाद अगले दो दशकों तक भारत-श्रीलंका संबंध सामान्यतः ठीक रहे। लाल बहादुर शास्त्री जी ने तमिल प्रवासियों के संदर्भ में जो समझौतें के लिए प्रयास किए वह काफी हद तक महत्त्वपूर्ण साबित हुए।