श्रीमती इंदिरा गांधी का युग और भारतीय डायस्पोरा नीति - Era of Mrs. Indira Gandhi and Indian Diaspora Policy
श्रीमती इंदिरा गांधी का युग और भारतीय डायस्पोरा नीति - Era of Mrs. Indira Gandhi and Indian Diaspora Policy
1966 में इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनी। नेहरू काल की तुलना में इस काल में प्रवासी भारतीयों के लिए डायस्पोरा नीति अधिक सक्रीय हुई दिखती है। श्रीमती इंदिरा गांधी की नीति प्रवासी भारतीयों के प्रति प्रोत्साहन वाली की थी। हालाँकि उन्होंने अक्सर विशिष्ट व्यापारिक उद्देश्यों के लिए भारतीय मूल के हिंदुजा जैसे भारतीय व्यापार समूहों के अंतरराष्ट्रीय प्रभाव में उनको शामिल किया था इंदिरा गांधी के शासन में नेहरूवादी आदर्शवाद से भारत की विदेश नीति एक परिवर्तन के बावजूद डायस्पोरा नीति की स्थिति में कोई खास परिवर्तन नहीं आया।
1950 और 1960 के दशक में कई अफ्रीकी देशों ने उपनिवेशी सत्ता से स्वतंत्रता हासिल की थी। इंदिरा गांधी को इन देशों के राजनीतिक और अर्थिक महत्व का एहसास हुआ। इंदिरा गांधी ने एफ्रो- एशियाई देशों के बीच एकता और सहयोग को मजबूत करने के लिए अफ्रीकी देशों के साथ भारत के पड़ोसी देशों और गिरमिटिया देशों का दौरा किया। इन दौरों से उन्होंने विदेशों में भारत की एक अच्छी छवि बनाने की कोशिश की। इसी के तहत भारतीय डायस्पोरा से मिलना भी एक अहम मुद्दा था। 1964 में जब अफ्रीकी देशों का दौरा किया और वहाँ इस बात पर जोर दिया कि भारतीय डायस्पोरा को उन देशों के समाजों में अपना योगदान देना चाहिए,
जहाँ जाकर वेबस गए हैं। इसके साथ-साथ वह भारतीय लोगों और उनके नेताओं से मिलीं। उन्होंने प्रवासित भारतीय लोंगो को "भारत के राजदूत' की संज्ञा देते हुए कहा कि आप प्रवासी भारतीयों के कारण ही विदेशों में हमारी इतनी अच्छी छवि का निर्माण हुआ है।
इंदिरा गांधी के समय में भी श्रीलंका में तमिल प्रवासियों की समस्या जारी थी और इससे पूर्व जो प्रयास किए गए उन प्रयासों से पूरी तरह समाधान नहीं हो पाया। इसके लिए उन्होंने उस दिशा में प्रयास प्रारंभ कर दिए। तमिल प्रवासियों की समस्या को हल करने के लिए दिसम्बर 1968 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डडले सेनानायके ने भारत की यात्रा की सेना नायके ने भारतीय प्रवासियों के समस्याओं पर श्रीमती इंदिरा गांधी से विचार विमर्श किया।
श्रीमती भण्डारनायके सरकारने भारत सरकार को 15 जून 1970 को आश्वासन दिया कि श्रीलंका सरकार शास्त्री नायके समझौते की शर्तों को पूर्ण करने का प्रयास करेगी। प्रवासी तमिल समस्या को हल करने के लिए 27 अप्रैल, 1973 श्रीमती इंदिरा गांधी ने श्रीलंका की यात्रा की। श्रीमती गांधी ने श्रीमती भंडारनायके के साथ वार्तालाप किया दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच के वार्तालाप से संयुक्त विज्ञप्ति जारी किया।
मॉरिशस को लघु भारत के रूप में जाना जाता है, जहाँ प्रवासी भारतीयों की संख्या लगभग 9 लाख से ज्यादा है। 1970 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने मॉरीशस की यात्रा की उस यात्रा के दौरान श्रीमती गांधी ने भारतीय डायस्पोरा से भेंट की तथा उन्होंने मॉरिशस में 3 जून 1970 को महात्मा गांधी संस्थान की आधारशिला रखी।
इसी यात्रा के दौरान श्रीमती इंदिरा गांधी ने मॉरिशस के प्रसिद्ध आप्रवासी घाट को भेंट दी। यह घाट मॉरिशस और भारत के बीच का ऐतिहासिक मिल का पत्थर है। 1976 में श्रीमती इंदिरा गांधी ने मॉरिशस की एक बार फिर दूसरी यात्रा की। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य महात्मा गांधी संस्थान का उदघाटन करना था। 9 सितंबर 1976 को श्रीमती गांधी और सर शिवसागर रामगुलाम जी ने महात्मा गांधी संस्थान का उदघाटन किया। श्रीमती गांधी ने उदघाटन भाषण- इस संस्थान का नामकरण बहुत उचित और प्रसन्नतादायक है क्योंकि महात्मा गांधी के महत्व को आगामी वर्षों में उत्तरोत्तर अधिकाधिक समझा जाएगा। यह संस्थान भारत और मॉरिशस के बीच मित्रता का स्थायी और भावनात्मक प्रतीक है।
इससे पहले जब मैं यहाँ आई थी तो मुझे महात्मा गांधी के संक्षिप्त प्रवास के बारे में जानकारी मिली थी। स्वयं मॉरिशस की तरह महात्मा गांधी दो महाद्वीपों के बीच संबंध-सेतु थे।'
फीजी प्रशांत द्वीप समूहों में से एक छोटा सा द्वीप है जहाँ भारतीयों की आबादी वहाँ की जनसंख्या में करीब 37% प्रतिशत है। फीजी 10 अक्टूम्बर 1970 को स्वतंत्र हुआ। भारतीय समुदाय को भारत के साथ जोड़ने के लिए श्रीमती इंदिरा गांधी ने ई.स. 1981 में फीजी की दो दिवसीय यात्रा की।
उस समय फीजी की अध्यक्षता में रुत्तु सर कमसिज मारिया थी और उनकी सत्तारूढ़ गठबंधन के सरकार में ज्यादातर भारतीय, अल्पसंख्यक और स्वदेशी फीजी के लोग थे। श्रीमती गांधी के इस यात्रा के दो मुख्य उद्देश्य थे 1 ) फीजी के भारतीय मूल के लोगों से सीधा संपर्क बनाना तथा उनको दूर देश में और प्रगति करने के लिए प्रोत्साहन देना था, क्योंकि फीजी में भारतीय समुदाय का एक दल राजनीति में भी सक्रीय रूप से उभरने की कोशिश में था। 2) दूसरा उद्देश्य यह था कि दक्षिण प्रशांत महासागर द्वीप समूह में फीजी ही ऐसा द्वीप समूह था जिसने ब्रिटिश उपनिवेश से एक बहुजातीय लोकतंत्र के लिए सुचारू परिवर्तन की सराहना की।
इस यात्रा के दौरान श्रीमती गांधी ने भारतीय मूल के लोगों को कहा कि- - • विवाहित बेटियों के लिए मेरे हृदय में वैसी ही संवेदना है, जैसी की एक माँ के हृदय में दूर ससुराल में बैठी अपनी बेटी के लिए होती है।'
श्रीमती गांधी ने अपने शासन काल के दौरान गिरमिटिया देशों में त्रिनिदाद और टोबागो तथा ब्रिटिश गुयाना की भी यात्रा की। इसके साथ ही वे दक्षिण एशियाई देशों- मलेशिया, बर्मा और सीलोन में भी गई। इन देशों के दौरे करने का उनका मकसद राजनीतिक के साथ-साथ प्रवासी भारतीयों से मिलना भी था।
उन्होंने भारतीय डायस्पोरा को विदेशों में भारत की अच्छी साख बनाने के साधन के रूप में देखा। इसी समय पूर्वी अफ्रीका के केन्या देश में अफ्रिकीकरण की नीति की शुरुआत हुई जिसके तहत वहाँ की सभी प्रकार की व्यवस्थाओं में अफ्रीकी मूल को प्राथमिकता देने प्रारंभ हुए उस समय काफी संख्या में भारतीय मूल के लोग वहाँ रह रहे थे। 1972 में ईदी अमिन ने युगांडा में रहने वाले भारतीयों 90 दिनों में यूगांडा छोड़ने का आदेश दिया। उस समय तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार ने किसी भी प्रकार की प्रभावी मदद की पेशकश नहीं की।
इस तरह श्रीमती इंदिरा गांधी की डायस्पोरा नीति को देखा जाए तो नेहरु के दृष्टिकोण से भिन्न थी हालाँकि उन्होंने नेहरु के नीति को आगे बढ़ाया परंतु उनका डायस्पोरा समर्थक दृष्टिकोण था।
इसलिए वह भारत की आर्थिक स्थिति को देखते हुए वैज्ञानिकों को भारत बुलाना चाहती थी लेकिन परिस्थितिवश उन्होंने संकटकालीन स्थिति में भारतीय मूल के लोगों के तरफ अधिक ध्यान नहीं दिया। भारत ने डायस्पोरा से दूरी बनाके रखी। साथ ही पूर्वी अफ्रीका में आए भारतीय लोगों पर सकंट के समय कोई विशेष पहल नहीं किया गया जसके कारण बहुत सारे सफल भारतीय लोग भारत न आकर अन्य देशों में प्रवासित हो गए।
इस तरह श्रीमती गांधी के शासन में डायस्पोरा नीति का मूल्यांकन से स्पष्ट होता है कि भारतीय डायस्पोरा की समस्याओं के प्रति भारत सरकार चिंतित थी नेहरु के सक्रिय असाहचर्य (active disassociation) की नीति से श्रीमती गांधी का दृष्टिकोण थोड़ा भिन्न था।
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