लोक नृत्य : श्रेणी विभाजन - Folk Dance : Category Division
लोक नृत्य : श्रेणी विभाजन - Folk Dance : Category Division
भारत एक विशाल देश है। इसकी यह विशालता लोक नृत्यों के सन्दर्भ में भी पूर्णतः दृष्टिगोचर होती है। प्रत्येक प्रान्त की अपनी सांस्कृतिक विशेषता है तथा प्रत्येक प्रान्त के अपने विविध लोक नृत्य हैं। लोक- साहित्यविदों ने इन लोक नृत्यों को श्रेणीवार इस प्रकार से विभाजित किया है-
गुजरात प्रदेश के लोक-गीतों को आधार बनाते हुए डॉ. महेन्द्र भानावत ने इन्हें इस प्रकार वर्गीकृत किया
(1) आनुशानिक लोक नृत्य
(2) अनुरंजनात्मक लोक नृत्य
(3) आदिम लोक नृत्य
राजस्थान के लोक नृत्यों को उनकी प्रकृति एवं स्वरूप के अनुसार डॉ. महेन्द्र भानावत ने तीन भागों में
विभाजित किया है-
(1) वृत्ताकार
(2) कतारबद्ध
(3) जुलूस रूप में
डॉ. हरिराम जसटा ने हिमाचल प्रदेश के लोक नृत्यों को इस प्रकार वर्गीकृत किया है-
(1) भाग लेने वाले लोगों की संख्या के आधार पर -
1. व्यक्तिगत नृत्य
ii. समूह लोक नृत्य
(2) लिंग जाति के आधार पर -
1. महिला लोक नृत्य
ii. पुरुष लोक नृत्य
iii. मिश्रित लोक नृत्य
(3) अवसर के आधार पर -
1. धार्मिक लोक नृत्य
ii. सामाजिक-धार्मिक नृत्य
iii. अवकाश या आनन्द नृत्य
(4) क्षेत्रीय आधार पर -
1. पहाड़ी लोक नृत्य
ii. आदिवासी लोक नृत्य
iii. मैदानी लोक नृत्य
किन्नौरी लोक नृत्यों को डॉ. हरिराम जसटा ने दो प्रमुख भागों में बाँटा है-
(1) मुखौटा लोक नृत्य, जैसे हारिड़ फो, खो इत्यादि ।
(2) साधारण लोक नृत्य, जैसे- कायड, इत्यादि ।
देवीलाल सामर ने समस्त भारत के लोक नृत्यों को प्रमुख तीन भागों में बाँटा है-
(1) आदिवासियों के नृत्य
(2) सामाजिक तथा सामुदायिक लोक नृत्य
(3) व्यावसायिक लोक नृत्य
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