लोक गाथाओं की भारतीय परम्परा - Indian tradition of folk tales

लोक गाथाओं की भारतीय परम्परा - Indian tradition of folk tales


भारत में लोक-कथाओं की भाँति ही लोक-गाथाओं की परम्परा भी अत्यन्त प्राचीन है। जैसा कि पूर्व में उल्लेख किया जा चुका है कि ऋग्वेद में 'गाथा' शब्द का प्रयोग पद्य या गीत के अर्थ में अनेक मंत्रों में मिलता है। साथ ही, प्राचीन आख्यान या कथा कहने वाले के लिए 'गाधिन' शब्द का प्रयोग भी मिलता है। अतः गाथा का अर्थ कोई आख्यान या कथा भी माना जा सकता है। इसके साथ ही उस युग में शुभ अवसरों पर गाये जाने वाले गीतों को भी गाथा ही कहा जाता था और वैदिक युग में लोकप्रिय राजा के सत्कार्यों के सम्बन्ध में जो गीत गाये। जाते थे, उनके लिए भी 'गाथा' शब्द का प्रयोग मिलता है।

इससे ज्ञात होता है कि वैदिक युग में यद्यपि 'गाथा' का स्वरूप स्पष्ट नहीं था किन्तु इस शब्द का प्रयोग उन आख्यानों या कथाओं के लिए होता था जिनमें गेयता का योग होता था । अतः कह सकते हैं कि ऋग्वेद में प्राप्त कुछ सूक्त और गाथाएँ लोक गाथा की भारतीय परम्परा में प्राप्त प्राचीनतम गाथाएँ हैं। वैदिक गाथाओं के उदाहरण आगे चलकर ब्राह्मण ग्रन्थों में भी उपलब्ध होते हैं। इस समय तक गाथाओं का स्वरूप निखर कर नहीं आया था और वे हमें बीज रूप में ही प्राप्त होती हैं किन्तु समय के साथ निरन्तर विकास की ओर अग्रसर लोक गाथाएँ साहित्य के पृथक् अंग के रूप में स्वीकार की जाने लगीं और प्राचीन आख्यान, उपाख्यान और गाथाओं के संकलन को पुराण के रूप में स्वीकार किया जाने लगा।


विकास पथ पर अग्रसर गाथाएँ तथागत बुद्ध के युग तक पहुँचते-पहुँचते जनसाधारण में प्रचलित हो गई। और जन-समाज की सम्पत्ति बन गई। इन्हीं लोकप्रचलित गाथाओं में से सात सौ गाथाओं का संकलन सातवाहन ने 'गाथा सप्तशती' में किया। इसी प्रकार बुद्ध के जीवन से सम्बन्धित कथाओं और गाथाओं का संकलन 'जातक' नामक पालि-ग्रन्थ में उपलब्ध होता है। अपभ्रंश काल में लोक तत्त्वों और लोक-जीवन की झाँकी प्रस्तुत करने वाला ग्रन्थ 'सन्देशरासक' प्राप्त होता है जिसे तत्कालीन लोक गाथाओं के आधार पर ही निर्मित माना जाता है।


प्रस्तुत विवेचन से स्पष्ट है कि लोक गाथाओं की भारतीय परम्परा अत्यन्त प्राचीन है। ऋग्वेद में बीज रूप मैं मिलने वाली गाथाएँ समय के साथ निरन्तर विकास पथ पर अग्रसर होकर आज विशाल वट वृक्ष के रूप में हमारे समक्ष हैं। भारत के विभिन्न प्रदेशों में इसकी जड़ें व्याप्त हैं और थोड़े बहुत परिवर्तन के साथ आज भी अनेक गाथाएँ गायी और सुनी जाती हैं।