हिन्दी की जनपदीय ब्रजभाषा बोली के लोक-साहित्य का परिचय - Introduction to the folk literature of the regional Brajbhasha dialect of Hindi

हिन्दी की जनपदीय ब्रजभाषा बोली के लोक-साहित्य का परिचय - Introduction to the folk literature of the regional Brajbhasha dialect of Hindi


ब्रज के लोक-गीतों में भोजपुरी, अवधी के सोहर के समान ही एक लोक कथा गीत के रूप में गायी जाती है। किसी सास व ननद ने बहू की आँखों पर पट्टी बाँध दी और उसके नवजात शिशु को घुरे पर फिंकवा दिया और बेटे से कहा कि तेरी पत्नी ने पत्थर जन्मा है। यह सुन पति अपनी पत्नी को रथ में जुतवा देता है। उधर नवजात शिशु एक मालिन के घर पलकर बड़ा होता है। बड़ा होकर सच्चाई को जानने पर वह अपनी माँ को प्रतिष्ठा देकर दादी को दण्ड देता है-


आधौ राजु जा मालिन ऐ देउ जानै तौ हम पारिए, दादी ऐ चौराहे पे देवू गढ़वाय, जाने हम घूरे पै दिए डलवाए।