हिन्दी की जनपदीय बुंदेली बोली के लोक-साहित्य का परिचय - Introduction to folk literature of the regional Bundeli dialect of Hindi
हिन्दी की जनपदीय बुंदेली बोली के लोक-साहित्य का परिचय - Introduction to folk literature of the regional Bundeli dialect of Hindi
बुंदेलखंड में संचतगीत प्रचलित हैं। संचतगीत मातृभावना के प्रतीक हैं। संचत शब्द का अर्थ है 'सन्तति' । गर्भावस्था में छठे या आठवें माह में फूल-चौका किया जाता है। यह रिवाज वैदिक पुंसवन संस्कार का ही एक रूप है। गर्भवती स्त्री मायके से भेजे गए लाल रंग के वस्त्र पहनकर चौके पर बैठती है। इन गीतों को गीत कड़ौ भी कहते हैं। पड़ोस की महिलाएँ महीने भर आकर सादन के गीत गाती हैं।
इन गीतों में पुत्र न होने का दुःख भी अभिव्यक्त किया जाता है-
जशोदा के महलन बेग चलो री,
महल के अंदर बेग चलो री। बंदनवारे बंदे अति सोहें
लगी आम की धौरें।
जशोदा के महलन बेग चलो री, सोने के कलश घरे अति सोहें, उनहू की ऊँची पौरें। जशोदा के महलन बेग चलो री।
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