हिन्दी की जनपदीय कन्नौजी बोली के लोक-साहित्य का परिचय - Introduction to the folk literature of the district Kannauji dialect of Hindi

हिन्दी की जनपदीय कन्नौजी बोली के लोक-साहित्य का परिचय - Introduction to the folk literature of the district Kannauji dialect of Hindi


1. लोक नाट्य : नौटंकी


उत्तरप्रदेश के इस क्षेत्र की नौटंकी में लोक कथा और किंवदन्तियाँ रहती हैं। सुलतान और शहजादी का प्रेमप्रसंग ही इन ख्यालों का मुख्य आधार है। इन्हीं से नौटंकी का बीजारोपण हुआ। कानपुर तथा हाथरस दोनों स्थानों की नौटंकी की अपनी विशिष्ट शैली है। इनमें हाथरसी शैली की नौटंकी का संगीत अत्यन्त सरल और सुगम है। कानपुरी नौटंकी की मंचसज्जा पारसी रंगमंच से प्रभावित है। इसके वेशविन्यास में चमक-दमक और भड़कीलापन कम रहता है।

इसके लिए रंगशाला की आवश्यकता नहीं होती। नौटंकी प्रायः हिन्दी की सभी बोलियों में खेली जाती है। इसमें कोई विशेष अन्तर नहीं होता किन्तु कथ्य और शैली में क्षेत्रीय विशेषता दिखाई देती है।



2. लोक गीत :


बम भोला चले कैलास बुंदियाँ परन लगीं, शिवशंकर चले कैलास बुंदियाँ परन लगीं। गौरा ने बोड़ दई हरी हरी मेंहदी, बम भोला ने बोड़ दई भाँ बुंदियाँ परन लगीं ॥