लोक-साहित्य के अग्रणी विद्वान - डॉ. वासुदेव शरण अग्रवाल - Leading scholar of folklore - Dr. Vasudev Sharan Agarwal
लोक-साहित्य के अग्रणी विद्वान - डॉ. वासुदेव शरण अग्रवाल - Leading scholar of folklore - Dr. Vasudev Sharan Agarwal
डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल ने लोक-साहित्य के अध्ययन को गति प्रदान की है। डॉ. अग्रवाल ने लोक-साहित्य के प्रमाताओं को सदा ही प्रोत्साहित किया है। इन्हीं के प्रयास से मथुरा में 'ब्रज साहित्य मण्डल' की स्थापना हुई जिसके तत्त्वावधान में 'ब्रजभारती' पत्रिका प्रकाशित होती है। इनके ग्रन्थ 'पृथ्वीपुत्र' में जनपदीय कल्याणकारी योजना का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया है। 'पृथ्वीपुत्र' पुस्तक लोक-साहित्य के क्षेत्र में अध्ययन-अनुसन्धान कार्य करने वालों के लिए एक मार्गदर्शक ग्रन्थ के रूप में प्रतिष्ठित है।
जनपद कल्याणकारी योजना का सूत्रपात करना, लोक-साहित्य-संग्रहकों को सूत्रबद्ध कर इस कार्य में जुटाना, टीकमगढ़ से 'लोक वार्ता' पत्रिका निकालना आदि इनके स्तुत्य कार्य हैं। डॉ. सत्येन्द्र, डॉ. कृष्णदत्त वाजपेयी, बनारसीदास चतुर्वेदी, कृष्णचन्द गुप्त, डॉ० अम्बाप्रसाद 'सुमन' आदि दिग्गजों को लोक-साहित्य के क्षेत्र में कार्य करने के लिए प्रवृत्त करने का श्रेय डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल को ही हैं। सच तो है कि लोक-साहित्य को उच्चस्तरीय अध्ययन का विषय बनाने में डॉ. अग्रवाल और डॉ. धीरेन्द्र वर्मा का योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता।
लोक-साहित्य की महत्ता और उसके संग्रह-संरक्षण का आह्वान करते हुए डॉ. अग्रवाल ने डॉ. सिद्धेश्वर को लिखा था "हमें अब सामूहिक चिन्ता है कि किस प्रकार साहित्यश्री हमें फिर से प्राप्त हो। इस प्रयोजन के लिए हमारे पास वहाँ से निमन्त्रण आया है जहाँ भूमि का मीठा दूध प्रतिवर्ष सूर्य की किरणों से दही जमाकर जौ, गेहूँ के अरबों दानों से हमारे कोठरों को लक्ष्मी से भर देता है और इसी सागर में हमारा विष्णु सोया हुआ है, उसके पास हमारी साहित्यश्री विराजमान है। वहाँ से उसका आह्वान करना हमारी दीपावली का सन्देश है। "
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