लोक-साहित्य के अग्रणी विद्वान - झवेरचन्द मेघाणी - Leading scholar of folklore - Jhaverchand Meghani

लोक-साहित्य के अग्रणी विद्वान - झवेरचन्द मेघाणी - Leading scholar of folklore - Jhaverchand Meghani


गुजरात में लोक-साहित्य की एकान्त साधना में रत झवेरचन्द मेघाणी ने गुजराती लोक-साहित्य के संकलन एवं संरक्षण हेतु श्लाघनीय कार्य किया है। उन्होंने गुजराती लोक गीतों, लोक-कथाओं, शिशु-गीतों, गौर- गाथाओं आदि का विशाल संग्रह प्रस्तुत किया। 'कंकावटी' का प्रकाशन रनपुर से सन् 1927 में हुआ। इसके बाद सन् 1925 से 1942 के मध्य 'रढियाली रात' के नाम से लोक-गीतों का संकलन चार भागों में प्रकाशित हुआ । इस संग्रह में प्रत्येक प्रकार के गीत हैं। सन् 1928 में इनकी महत्त्वपूर्ण पुस्तक 'चूंदड़ी' के दो भाग प्रकाशित हुए।

'हालरडों' में पालने के गीतों का संग्रह है। 'सोरठी गीत' एक कथा संकलन है जिसमें ग्रामीण जीवन पर आधारित कहानियाँ है। इन संग्रहों के अतिरिक्त झवेरचन्द मेघाणी ने लोक-साहित्य का सैद्धान्तिक विवेचन भी प्रस्तुत किया है । झवेरचन्द मेघाणी द्वारा बम्बई विश्वविद्यालय में प्रस्तुत व्याख्यानों का संग्रह लोक-साहित्य की अमूल्य निधि है। 'धरतीनुधावन' ग्रन्थ में अनेक प्रस्तावनाओं का संकलित हैं लोकसाहित्य मर्मज्ञ झवेरचन्द मेघाणी लोकसामग्री का संग्रह मात्र ही नहीं करते थे वरन् अपने मधुर कण्ठ से गाकर उन्हें सुनाते भी थे।