लोक-साहित्य के अग्रणी विद्वान - महापण्डित राहुल सांकृत्यायन - Leading scholar of folklore - Mahapandit Rahul Sankrityayan

लोक-साहित्य के अग्रणी विद्वान - महापण्डित राहुल सांकृत्यायन - Leading scholar of folklore - Mahapandit Rahul Sankrityayan


राहुल सांकृत्यायन का जन्म अपने ननिहाल पन्दहा ग्राम, आजमगढ़ में 09 अप्रैल 1893 को हुआ। पन्दहा से दस मील दूर कनैला ग्राम इनकी मातृभूमि थी। इनके पिता का नाम गोवर्धन पाण्डेय और माता का नाम कुलवन्ती था। इनका बचपन का नाम केदार पाण्डेय था। इनकी प्रारम्भिक शिक्षा अपने ग्राम में ही हुई। प्रारम्भ से ही ये घुमक्कड़ी स्वभाव के थे। जीवनपर्यन्त वे कभी एक स्थान पर टिक न सके। साहित्यकारों ने उन्हें प्रथम श्रेणी का घुमक्कड़ कहा है। घूमते-घूमते ही इन्होंने 30 से अधिक भाषाएँ सीख लीं। ये बौद्ध और साम्यवादी हुए।


राहुल सांकृत्यायन की प्रारम्भिक यात्राओं ने उन्हें दो दिशाएँ प्रदान कीं। एक तो प्राचीन एवं अर्वाचीन विषयों का अध्ययन तथा दूसरा देश देशान्तरों की अधिक से अधिक प्रत्यक्ष जानकारी प्राप्त करना । इन दो प्रवृत्तियों से अभिभूत होकर राहुलजी पर्यटक और अध्येता बने। राहुलजी का पर्यटन केवल पर्यटन के लिए नहीं था। उनके पर्यटन के मूल में अध्ययन की प्रवृत्ति प्रमुख थी। इन्होंने विश्व के विभिन्न देशों, इग्लैंड, यूरोप, पश्चिमी एशिया, जापान, कोरिया, मंचूरिया, सोवियत रूस की व्यापक यात्रा कर साहित्यिक, सांस्कृतिक विचारधाराओं का अध्ययन एवं चिन्तन किया था।

इन्होंने तिब्बत की यात्रा चार बार तथा लंका की यात्रा तीन बार की। राहुलजी की हिन्दी में गहरी निष्ठा थी । ये महान् पण्डित और बहुभाषी थे। संस्कृत, पालि और अपभ्रंश के तो ये मान्य पण्डित थे । दर्शन, इतिहास तथा तुलनात्मक धर्म के ये अद्वितीय विद्वान् थे। अपनी विद्वता के कारण वे रूस के लेनिनग्राव विश्वविद्यालय में संस्कृत के प्रोफेसर नियुक्त किये गए।


उनकी लेखनी की अजस्र धारा से साहित्य, दर्शन, धर्म, इतिहास, संस्कृति आदि विभिन्न विषयों पर 150 से भी अधिक ग्रन्थ प्रकट हुए। उनके प्रकाशित ग्रन्थों की संख्या 126 है।

उनके द्वारा लिखित लेख, निबन्ध एवं प्रस्तुत व्याख्यानों की संख्या कई हजार है। इनके बहुआयामी व्यक्तित्व और कृतित्व से प्रभावित होकर भारत सरकार ने इन्हें पद्मभूषण की उपाधि से विभूषित किया। उनकी विद्वता से अभिभूत हो श्रीलंका ने उन्हें लिपिकाचार्य और डी.लिट्. की मानद उपाधि प्रदान की है। राहुलजी को साहित्य वाचस्पति, महापण्डित आदि अनेक उपाधियों से सम्मानित किया गया है। महापण्डित राहुल सांकृत्यायन ने अपनी प्रखर लेखनी के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों के अछूते विषयों पर अनुसन्धानपरक लेख लिखकर मानव जाति का सही अर्थों में सच्चा मार्गदर्शन किया है। उनके जीवन-दर्शन की स्पष्ट झलक उनके विचारों में परिलक्षित होती है।