लोक-साहित्य के अग्रणी विद्वान - श्री देवेन्द्र सत्यार्थी - Leading scholar of folklore - Mr. Devendra Satyarthi
लोक-साहित्य के अग्रणी विद्वान - श्री देवेन्द्र सत्यार्थी - Leading scholar of folklore - Mr. Devendra Satyarthi
सत्यार्थी उन विभूतियों में से हैं जिन्होंने लोक-गीतों के संग्रह-कार्य को अपने जीवन का ध्येय ही बना लिया था। ये मूलतः पंजाब के निवासी थे। इन्होंने भारत के सभी जनपदों की यात्राएँ कीं। सुदूर अंचलों की खाक छानकर आदिवासी वृद्धाओं, युवक-युवतियों से सम्पर्क कर इस महारथी ने लोक-गीतों का संग्रह किया है। लोक गीतों का संग्रह करने के साथ ही इन्होंने उनकी व्याख्या और आलोचना इतनी भावुकता भरी शैली में की है कि सहृदय पाठक भाव-विभोर हो उठता है।
देवेन्द्र सत्यार्थी द्वारा भावात्मक शैली में लिखे निबन्ध अद्वितीय हैं । सत्यार्थीजी ने इन निबन्धों में उदाहरण के रूप में पूरे-पूरे गीत भी दे दिये हैं। डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल ने सत्यार्थीजी को लिखे एक पत्र में लिखा है "अब तो समान शील और सदृश चिन्तन वाले मनुष्यों को मिलकर कुछ प्रयोग करना ही चाहिए। आप भी हम लोगों के साथ इसी नाव पर है। साथ ही क्यों, नाव का गुन अपनी कमर से बाँधकर उसे बहुत पहले ही खींचकर ले चलने वाले नाविक का रूप आपका ही है।"
सत्यार्थीजी लोक संग्रहकर्त्ताओं के शिरोमणि कहे जाते हैं। उनकी पुस्तकों में 'बेला फूले आधी रात', 'बाजत आवे ढोल', 'धीरे बहो गंगा' अत्यन्त लोकप्रिय हैं। बहुचर्चित 'आजकल' पत्रिका का सम्पादन करके इन्होंने लोक-साहित्य की बड़ी सेवा की है। पण्डित गौरीशंकर द्विवेदी ने अपने जिस 'प्रेमी अभिनन्दन ग्रन्थ' में बुंदेलखंडी लोक-गीतों का संग्रह और उसकी व्याख्या प्रस्तुत की है उस ग्रन्थ में श्री देवेन्द्र सत्यार्थी ने बुंदेलखंड के सात प्रमुख लोक-गीतों की चर्चा अपनी भावात्मक शैली में की है।
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