लोक-साहित्य के अग्रणी विद्वान - सर जार्ज ग्रियर्सन - Leading scholar of folklore - Sir George Grierson
लोक-साहित्य के अग्रणी विद्वान - सर जार्ज ग्रियर्सन - Leading scholar of folklore - Sir George Grierson
डॉ॰ ग्रियर्सन का जन्म डबलिन में 7 जनवरी सन् 1851 को हुआ। पिता डबलिन के प्रसिद्ध बैरिस्टर थे । डबलिन के ट्रिनिटी कॉलेज से बी.ए. उपाधि प्राप्त करने के बाद करने के उपरान्त उच्च शिक्षा के लिए कैम्ब्रिज गए। वहाँ से गणित विषय में ऑनर्स किया। मीर औलाद अली से हिन्दुस्तानी तथा प्रो० एटकिंसन से संस्कृत का अध्ययन किया। सन् 1871 में आई.सी.एस. की परीक्षा उत्तीर्ण कर भारत आए नौकरी के साथ-साथ इन्होंने अपना अध्ययन जारी रखा । इनके अध्ययन का विषय भारतीय आर्य भाषा था ।
इन्होंने संस्कृत और प्राकृत के साथ हिन्दी, बांग्ला और बिहार की भाषाओं का अध्ययन किया। सन् 1980 में इनका ग्रन्थ मैथिली व्याकरण प्रकाशित हुआ जिसमें विद्यापति के गीतों संग्रह पहली बार प्रकाशित हुआ। इनके भारत निवास का अधिकांश समय बिहार में व्यतीत हुआ। इन्होंने बहुत समीप से बिहार के निवासियों का रहन-सहन, आचार-विचार, व्यवहार अन्धविश्वास, नामकरण की परम्परा आदि का अनुसन्धान किया। सन् 1885 में उनकी पुस्तक 'बिहार पीजेंट लाइफ' प्रकाशित हुई। यह पुस्तक ग्रामीण शब्दावली का कोश है। बाद में इस ग्रन्थ से प्रेरित होकर हिन्दी क्षेत्र के विभिन्न अंचलों पर शोध कार्य सम्पन्न हुए हैं।
ग्रियर्सन ने भाषा विज्ञान के क्षेत्र में अद्वितीय कार्य करने के साथ ही भारतीय लोक-गीतों तथा लोक- कथाओं का संकलन भी किया है। इन्होंने सन् 1885 में 'सम बिहारी हिन्दी साँग्स' नामक एक लेख प्रकाशित किया, जिसमें बिहारी भाषा के विभिन्न प्रकार के लोक-गीतों का संग्रह है। सन् 1886 में ग्रियर्सन का एक अन्य बृहत् और विद्वतापूर्ण आलेख प्रकाशित हुआ जिसमें भोजपुरी के बिरहा, जतसार, सोहर आदि गीतों का संग्रह किया गया है। भोजपुरी लोक गीतों का प्रथम संकलन तैयार करने का श्रेय ग्रियर्सन को प्राप्त है।
उन्होंने 'विजयमल' नामक लोक गाथा का संकलन सन् 1864 में किया। सन् 1865 में इनका लेख 'दि सॉन्ग ऑव आल्हा गैरेज' छपा। इस लेख में उन्होंने आल्हा के विवाह से सम्बन्धित लोक गाथा का मूलरूप प्रस्तुत किया। इसके साथ ही ग्रियर्सन ने गोपीचन्द की लोक गाथा का भोजपुरी तथा मराठी पाठ भी एकत्र किया है। सन् 1886 में जर्मनी की प्रसिद्ध पत्रिका में इनका लेख 'नयका बनजरवा' छपा। यह भोजपुरी लोक गाथा है, जिसका प्रचलन उत्तरप्रदेश के पूर्वी भाग में अधिक है। डॉ. ग्रियर्सन के संकलन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उन्होंने मूल पाठ के साथ ही उसका अंग्रेजी अनुवाद भी किया है। बिहार पीजेंट लाइफ' ग्रन्थ में उन्होंने ग्रामीण जीवन की शब्दावली का बड़ा ही सुन्दर संग्रह किया है।
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