लोक-साहित्य के अग्रणी विद्वान - विलियम क्रुक - Leading Scholar of Folklore - William Crookes
लोक-साहित्य के अग्रणी विद्वान - विलियम क्रुक - Leading Scholar of Folklore - William Crookes
भारतीय लोक-साहित्य और लोक-संस्कृति के संग्रह और संरक्षण में सर विलियम क्रुक का नाम बड़े सम्मान से लिया जाता है। ये अंग्रेज सिविलियन थे और दीर्घ अवधि तक मिर्जापुर के कलक्टर रहे। उन्होंने लोक- साहित्य की एक पत्रिका का प्रकाशन भी किया। क्रुक ने सन् 1866 में 'पॉपुलर रेलीजन एंड हिन्दी लोक ऑव नादर्न इंडिया' नामक पुस्तक भी लिखी। इसमें इन्होंने जनसाधारण के अन्धविश्वास, जादू टोने-टोटके, नजर लगना- उतारना, ग्राम देवता, कुल देवता, भूत-प्रेत, रूढ़ियों, रीति-रिवाजों आदि विषयों का पूर्ण विवेचन किया है। इस पुस्तक में भोजपुरी प्रदेश की विभिन्न जातियों का विवरण चार भागों में प्रकाशित किया गया है।
1920 तक लोक-साहित्य की पर्याप्त सामग्री एकत्रित, सम्पादित तथा प्रकाशित हो चुकी थी। अब तक अधिकांश शोध कार्य विदेशी विद्वानों द्वारा ही किया गया था। भारतीय विद्वानों द्वारा भी इस सम्बन्ध में कुछ कार्य किया गया था किन्तु उनमें संगठन कौशल का अभाव दिखाई देता है। कालान्तर में भारतीय विद्वान् लोक-साहित्य के संरक्षण में प्राण-पण से जुटे और अथक परिश्रम करके उन्होंने अपनी इस सांस्कृतिक धरोहर को संकलित कर सुरक्षित किया।
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