लोकोत्सव : प्रतिपाद्य एवं महत्त्व - Lokotsav: Preposition and Importance

लोकोत्सव : प्रतिपाद्य एवं महत्त्व - Lokotsav: Preposition and Importance


लोकोत्सव का अध्ययन क्षेत्र प्रायः उत्सव, त्योहार व मेले आदि होते हैं। लोकजीवन में ये भाँति-भाँति के लोकोत्सव मानव सभ्यता के आदिकाल से ही मनाये जाते रहे हैं। ज्यों-ज्यों मानव सभ्यता ने विकास किया, त्यों-त्यों इनकी संख्या में बढ़ोतरी हुई तथा इन उत्सवों के आयोजन स्थल, समय व तिथियाँ भी तय होती गई । धीरे-धीरे इनमें विधि-विधान ने भी अपना स्थान बना लिया फलतः लोकजीवन में ये लोकोत्सव गहरे तक पैठते चले गए जो कि एक समृद्ध परम्परा के साथ आज तक चले आ रहे हैं। अधिकांशतः इन लोकोत्सवों की आधार- भूमि के रूप में धार्मिक- -भावना कार्य करती है। लोकोत्सवों के महत्त्व को इस प्रकार परिगणित किया जा सकता है-


01. लोकोत्सव किसी भी देश की संस्कृति के परिचायक होते हैं।


02. लोकोत्सवों के माध्यम से प्राचीनकाल से चली आ रही भारतीय लोक परम्पराओं को सींचा जाता है। 


03. इन लोकोत्सवों का आपसी सौहार्द स्थापना में महत्त्वपूर्ण स्थान है। ये पारस्परिक सामाजिक प्रेम और भ्रातृत्वभाव के वातावरण का निर्माण करते हैं।


04. ये मनोरंजन का वह महत्त्वपूर्ण साधन हैं, जहाँ अमीर-गरीब सभी वर्गों की सहज ही में पहुँच है। 


05. महापुरुषों पर आधारित लोकोत्सव समाज में उच्चादर्शों की स्थापना करने में सहायक हैं। इस रूप में ये जीवन-मूल्यों के संरक्षक भी हैं। 


06. जीवन को सरसता प्रदान करते हुए ये लोकोत्सव लोकजीवन में उमंगों, आशा व उत्साह का संचार करते हैं।


07. शारीरिक व मानसिक रूप से क्लान्त मन-मस्तिष्क में पुनः स्फूर्ति भरकर ताजगी का अहसास कराते हैं।


08. लोकोत्सवों से लोक-जीवन में भक्ति भावना व ईश्वरीय आस्था का संचार होता है। 


09. कुछ मेले ऐसे होते हैं, जहाँ देश के प्रायः प्रत्येक क्षेत्र के लोग पहुँचते हैं। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर आपसी


मेल-जोल बढ़ता है व बहुत कुछ नया सीखने-सिखाने का अवसर प्राप्त होता है।


10. लोगों में धार्मिक सहिष्णुता, दान-पुण्य, परोपकार, भक्ति-भाव, श्रद्धा-विश्वास, भाईचारे जैसी उत्कृष्ट भावनाएँ जाग्रत् होती हैं।


11. मेलों के अवसर पर उस क्षेत्र-विशेष में एक अस्थायी हाट-बाजार पनप जाता है, जहाँ बहुत-सी उपयोगी वस्तुओं का क्रय-विक्रय होता है। इस प्रकार ये मेले अंशकाल के लिए ही सही, परन्तु रोजगार उपलब्ध कराते हैं व जरूरतमंद लोगों को उपयोगी वस्तुएँ उपलब्ध कराते हैं।