डायस्पोरा और भारतीय डायस्पोरा का अर्थ और अभिप्राय - Meaning and implication of Diaspora and Indian Diaspora
डायस्पोरा और भारतीय डायस्पोरा का अर्थ और अभिप्राय - Meaning and implication of Diaspora and Indian Diaspora
सामान्यतः डायस्पोरा शब्द का प्रयोग उन लोगों के लिए किया जाता है, जो एक ही ऐतिहासिक और नृजातीय पृष्ठभूमि के साथ-साथ धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्य एक होते हुए भी समूहों के रूप में विभिन्न देशों और महाद्विपों में बसे हुए हैं। मौलिक रूप से इस शब्द का प्रयोग ई.पू. 586 में बेबिलियोना से यहूदी लोगों के निष्कासन तथा फिलिस्तीन के अतिरिक्त विश्व के अन्य भागों में उनके बिखरे हुए समुदाय के भावनात्मक जुड़ाव को समझाने के लिए किया गया है। वैश्विक स्तर पर फैले ऐसे लोगों में शामिल हैं: आर्मेनियाई, ग्रीक, अफ्रीकी, चायनीज, लेबनानी, बाल्टिक, जर्मन, नाइजीरिया, यूरोपियन, आयरलैंड, तिब्बती,
अफगानी, बंगलादेशी आदि के साथ-साथ भारतीय। इन्हें भारतीय डायस्पोरा / प्रवासी भारतीय कहा जाता है। (यू.एन 2015) की रिपोर्ट के अनुसार लगभग 20 मिलियन से अधिक भारतीय लोग 200 से अधिक देशों में फैले हुए हैं।
1834 ई. में अंग्रेजी साम्राज्य में दासता की प्रथा समाप्त होने से ही भारतीयों को झूठे लालच, आश्वासन व डराकर विदेशों में जाने हेतु तैयार किया गया, ताकि विविध जलवायु वाले प्रदेशों में फैले हुए उनके साम्राज्य के खाली भू को विकसित किया जा सके तथा उन्हें उद्योगों के लिए कच्चे माल मिल भू सके।
इस संदर्भ में काम करने वालों के साथ न्यूनतम वेतन पर पाँच साल हेतु एक अनुबंध (इन्डेचर सिस्टम) किया गया, जिसे अनुबंधित श्रमिक प्रणाली / गिरमिटिया श्रमिक प्रणाली कहा गया। इस व्यवस्था के अंतर्गत काफी मजबूरों को इंग्लैंड, फ्रांस व डच के उपनिवेशों में मॉरीशस, युगांडा, जंजीबार, तंगायनीका केनिया, दक्षिण अफ्रीका, फिजी, वेस्ट इंडीज, गुयाना, त्रिनिडाड, टाबैगो, सूरीनाम आदि क्षेत्रों में भेजा गया। इनमें से ज्यादातर लोग अनपढ़ थे तथा आर्थिक रूप से समाज के निम्न वर्ग से संबंधित थे। बाद में जब ये लोग अपने परिश्रम से कुछ खुशहाल बने तो वहाँ पर रहने वाले या उस देश के नागरिकों की नस्लीय भेदभाव का उन्हें सामना करना पड़ा।
भारतीय गिरमिटिया श्रमिकों की समस्याओं से रूबरू होने के लिए कांग्रेस तथा कुछ स्वतंत्र जाँच समितियाँ बनाई गई। महात्मा गांधी ने अनुबंधित गिरमिटिया श्रमिकों के मानवाधिकारों की रक्षा के लिए दक्षिण अफ्रीका में अहिंसक सत्याग्रह किया। महात्मा गांधी, गोपालकृष्ण गोखले, मणिलाल डॉक्टर, दीनबंधु एंडूज तोताराम सनाढ्य, मदनमोहन मालवीय जैसे भारतीय राजनैतिक नेतृत्व के संघर्षों के बाद वह अनुबंधित व्यवस्था 1917 ई. में समाप्त कर दी गई। इन देशों में रह रहे भारतीयों को ही भारतवंशी,
पुराना भारतीय डायस्पोरा या भारतीय मूल के लोग (Persons of Indian Origin PIO) कहा जाता है। भारत उस समय चूँकि ब्रिटिश उपनिवेश था, इसलिए औपनिवेशिक काल में भारत से समुद्रपारीय देशों में प्रवासित होने वाले भारतीयों के मानवाधिकार की रक्षा के लिए प्रशासनिक स्तर पर कोई सीधा प्रयास या हस्तक्षेप नहीं कर सकता था, बल्कि भारतीय नेता, स्वतंत्रता सेनानी, सामाजिक कार्यकर्ता आंदोलन कर सकते थे, राजनैतिक दल स्वतंत्र जाँच कर सकते थे और बाद में भारत के स्वतंत्रता के बाद इन्हीं आंदोलनों, सत्याग्रहों, जाँच प्रतिवेदनों सार रूप में हमारे विदेश नीति तथा विदेश में बस गए भारतवंशियों के साथ संबंधको बनाने में किया गया। इसीलिए औपनिवेशिक काल में भारतीय नेतृत्व द्वारा अनुबंधित श्रमिकों के मानवाधिकार की रक्षा के लिए किए गए इन्हीं प्रयासों को प्रस्तुत अध्याय में अध्ययन किया जाएगा।
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