प्रवासी कल्याण - migrant welfare

प्रवासी कल्याण - migrant welfare


भारत सरकार ने खाड़ी देशों में प्रवासित श्रमिकों के कल्याण एवं उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विभिन्न महत्वपूर्ण योजनाओं का शुभारंभ पिछले एक दशक के दौरान में किया है हमारे शोध के अंतर्गत जिन क्षेत्रों में श्रमिकों का प्रवासन हो रहा है, वह सभी देश ई. सी. आर. (ECR) पासपोर्ट की श्रेणी में आते हैं। खाड़ी क्षेत्र के अंतर्गत 17 देश आते हैं। इन सभी देशों के लिए, ई. सी. आर. पासपोर्ट धारक जो भारतीय श्रमिक हैं, वहाँ मौजूद हैं या जा रहे हैं उन्हें इन सभी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिलेगा।


इन सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में पेंशन स्कीम से लेकर जीवन बीमा सुरक्षा प्रदान करने वाली योजनाएँ सम्मिलित हैं। इन योजनाओं में प्रवासी भारतीय बीमा योजना,

महात्मा गांधी प्रवासी सुरक्षा योजना, प्रवासी कौशल विकास योजना और प्रवासियों तथा उनके परिजनों की विशेष सहूलियतों के लिए एक (24x7 x 365) हेल्पलाइन न. 1800113090 की सुविधा टोल फ्री मुहैया करायी गई है।


प्रवासी भारतीय बीमा योजना (Pravasi Bhartiy Bima Yojna) :


प्रवासी भारतीय बीमा योजना ई. सी. आर. (ECR) पासपोर्ट श्रेणी में श्रम कार्यों के लिए जा रहे सभी उत्प्रवासी श्रमिकों के लिए अनिवार्य हैं। प्रवासी भारतीय बीमा योजना की शुरुआत 2003 ई. में भारत के प्रथम प्रवासी भारतीय दिवस के अवसर पर की गई थी। इस योजना में बीमा जोखिम कवर रूपया 10 लाख है। 


महात्मा गांधी प्रवासी सुरक्षा योजना


ई. सी. आर. श्रेणी के 17 देशों में कार्यरत श्रमिकों के लिए इस सामाजिक सुरक्षा योजना को 4 जनवरी, 2012 ई. से लागू किया गया है। स्वैच्छिक भागीदारी वाली इस योजना के माध्यम से कामगारों को निम्नलिखित मामलों में मदद मिलती है-


1. अपनी वापसी और भारत में पुनर्वास के लिए बचत, 


2. अपने वृद्धावस्था की सुरक्षा के लिए


3. किसी दुर्घटना या प्राकृतिक रूप से मृत्यु की स्थिति में जीवन बीमा सुरक्षा।


प्रवासी कौशल विकास योजना


प्रवासी कौशल विकास योजना को हाल ही में 2 जुलाई, 2016 ई. को विदेश मंत्रालय ने उद्यमिता एवं कौशल विकास मंत्रालय के साथ एक समझौता (MOUs) पर हस्ताक्षर कर इस योजना की शुरुआत की। इस योजना के माध्यम से अपेक्षित कौशल एवं युवा वैश्विक मानकों के अनुसार विभिन्न क्षेत्रों में विदेश में नौकरी के अवसरों की तलाश करने के लिए प्रमाण प्रदान करना है। यह पहल उचित कौशल की कमी के कारण विदेशी नियोक्ताओं के हाथों उनके शोषण को रोकने के लिए किया जा रहा है।


इसके लिए विदेश मंत्रालय ने प्रवासित होने से पहले अभिविन्यास प्रशिक्षण (Pre-Departure Orientation Training) कार्यक्रम की शुरुआत की है।

इसके अंतर्गत गंतव्य देश की स्थानीय संस्कृति भाषा, कार्य संस्कृति, साथ-ही-साथ प्रासंगिक कौशल का ज्ञान भी दिया जाएगा।


प्रवासी भारतीय मंत्रालय की टोल फ्री हेल्पलाइन नं. 1800113090


विदेश में काम करने के इच्छुक लोगों की प्रमुख परेशानी विदेशों में रोजगार, भर्ती एजेंसियों और आव्रजन प्रक्रियाओं के बारे में प्रामाणिक एवं समय पर सूचना तक पहुँच बनाने की होती है। इन सूचनाओं के अभाव में यह बिचौलियों पर निर्भर होते हैं और शोषण का शिकार बन जाते हैं।

इस परेशानी से उबरने के लिए मंत्रालय ने 'विदेश कामगार संसाधन केंद्र की स्थापना की है, इसके माध्यम से आव्रजन के इच्छुक लोगों, विदेश में काम कर रहे श्रमिकों और उनके परिजनों को सूचना और सहायता दी जाती है। इस केंद्र का मुफ्त टेलीफोन नंबर 1800113090 सप्ताह के सातों दिन काम करता है और इससे प्रवासी श्रमिक और उनके परिजन आवश्यकता के अनुसार जानकारी ले सकते हैं।


प्रवासी कामगार संसाधन केंद्र आवश्यकता आधारित जानकारी प्रदान करने के लिए 11 भाषाओं (अंग्रेजी, हिंदी, पंजाबी, कन्नड़, मलयालम, बंगाली,

तमिल, तेलुगु, गुजराती, मराठी, ओड़िया) में 24 घंटे ( 24x7 x 365) एक हेल्पलाइन संचालित करता है जिसका टोल फ्री नंबर भारत में 1800113090 और विदेशों में कार्यरत भारतीय प्रवासियों के लिए +91-124-2341002 है। पंजीकरण, शिकायतों के निवारण और उनकी मॉनिटरिंग के लिए एकल बिंदु संसाधन के रूप में भी यह केंद्र कार्य करता है। प्रवासी कामगार संसाधन केंद्र को कोच्चि, हैदराबाद और गुड़गांव में प्रवासी संसाधन केंद्रों के साथ जोड़ा गया है। प्रवासी संसाधन केंद्र संभावित प्रवासियों को जानकारीमुहैया करवाते हैं, जो वैध प्रवास और प्रवास के दौरान ध्यान देने योग्य सावधानियों, नियोक्ता एजेंटों और सेवा प्रदाताओं की अवस्थिति से संबंधित होती हैं। प्रदान की गई सेवाओं पर ये केंद्र फीडबैक भी प्राप्त करते हैं और मंत्रालय द्वारा दिए गए परामर्श के अनुसार जागरूकता अभियान भी चलाते हैं। भारतीय समुदाय कल्याण कोष


प्रवासी मंत्रालय ने सभी इमीग्रेशन क्लीयरेंस की आवश्यकता (ECR) श्रेणी के देशों के भारतीय मिशनों की इच्छानुसार 'भारतीय समुदाय कल्याण कोष' (ICWF) की स्थापना की है। इससे भारतीय मिशन प्रवासी भारतीय नागरिकों के कल्याण से संबंधित गतिविधियों पर किए जाने वाले आकस्मिक व्यय को पूरा कर सकेंगे। इस कार्यक्रम के अंतर्गत प्रवासी भारतीय मामलों का मंत्रालय सभी 17 'इमीग्रेशन क्लीयरेंस रिक्वायार्ड' (ECR) देशों में भारतीय मिशनों को वित्तीय सहायता प्रदान करेगा, ताकि वे मेजबान देशों में संकट में फँसे श्रमिकों के कल्याण के लिए खर्च कर सकें।


उत्प्रवासी संरक्षण


भारत से हर वर्ष अनेक लोग विदेशों में रोजगार के प्रयोजनों के लिए प्रस्थान करते हैं। इनमें से लगभग 7-8 लाख उत्प्रवासी उन देशों में जाते हैं,

जिन्हें उत्प्रवास जाँच आवश्यक (ई. सी. आर.) देशों के रूप में अधिसूचित किया गया है। ये देश हैं: अफगानिस्तान, बहरीन, इंडोनेशिया, इराक, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, लीबिया, मलेशिया, ओमान, कतर, सऊदी अरब, दक्षिण सूडान, सूडान, सीरिया, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात और यमना इन उत्प्रवासियों में से बहुत से लोग कम पढ़े-लिखे और अर्ध-कुशल या अकुशल होते हैं; उनके पासपोर्ट पर एक उत्प्रवास जाँच आवश्यक की पट्टी चिपकाकर उन्हें पासपोर्ट जारी किया जाता है। रोजगार के लिए यात्रा करने से पूर्व, उन्हें उत्प्रवासी संरक्षक के कार्यालयों में से किसी एक से उत्प्रवास क्लीयरेंस प्राप्त करना आवश्यक है।

उत्प्रवास मंजूरी एक सुरक्षा उपाय है जो यह सुनिश्चित करता है कि उसे विदेशों में ठगा नहीं जाएगा और इसे वेतन की पेशकश की पुष्टि करने, रोजगार अनुबंध की शर्तों विदेशी नियोक्ता की साख और प्रवासी बीमा योजना के माध्यम से बीमा की पुष्टि करने के बाद जारी किया जाता है। उत्प्रवास मंजूरी दस उत्प्रवासी संरक्षक कार्यालयों चंडीगढ़, चेन्नई, दिल्ली, हैदराबाद, जयपुर, कोच्ची, कोलकाता, मुंबई, रायबरेली, और तिरुवनंतपुरम द्वारा ऑनलाइन जारी किए जाते हैं।


विदेशों में रोजगार, विशेष रूप से कम शिक्षित अंत्यावसायी सुरक्षा को विनियमित करने के लिए, उत्प्रवास जाँच आवश्यक प्रक्रिया को 'ई-माइग्रेट' नामक अनूठी कंप्यूटरीकृत प्रणाली के माध्यम से नियंत्रित किया जाता है।

यह प्रणाली विदेश मंत्रालय की पासपोर्ट सेवा परियोजना, गृह मंत्रालय के अप्रवासन ब्यूरो एवं दूसरी ओर 18 ई. सी. आर. देशों में स्थित भारतीय मिशनों, विदेशी नियोक्ताओं एवं पंजीकृत भर्ती एजेंटों के साथ जुड़ा हुआ है। यह भारतीय कामगारों के संभावित शोषण के खिलाफ सुरक्षा सुनिश्चित करने का एक उपाय है।


ई-माइग्रेट प्रणाली उत्प्रवासी महासंरक्षक के नियंत्रण में कार्य करती है जो विदेशी नियोजन हेतु विदेश जाने वाले भारतीय लोगों की सुरक्षा के लिए उत्प्रवासी अधिनियम,

1983 ई. के अंतर्गत शक्तियों एवं उत्तरदायित्वों का निर्वहन करते हैं। प्रवासी कार्य मंत्रालय एवं विदेश मंत्रालय के विलय के बाद विदेश मंत्रालय का प्रवासी रोजगार प्रभाग ई. सी. एन. आर. देशों में संकट में पड़े प्रवासी भारतीयों और गैर-ई. सी. आर. पासपोर्ट धारकों की सहायता के लिए उन तक मदद पहुँचा रहा है। यह अनुभाग भारत के विभिन्न राज्यों में संचालित अवैध भर्ती गतिविधियों के खिलाफ राज्य सरकारों की मदद से उत्प्रवास अधिनियम, 1983 की प्रावधानों के उल्लंघन के लिए कार्यवाही भी करता है।


उत्प्रवासी महासंरक्षक


विदेश मंत्रालय में उत्प्रवासी महासंरक्षक रोजगार के प्रयोजनों के लिए विदेश जाने वाले भारतीय कामगारों के हितों की रक्षा के लिए उत्तरदायी प्राधिकारी है।

पीजीई विदेशी जनशक्ति निर्यात व्यापार के लिए भर्ती एजेंटों (आरए) को पंजीकरण प्रमाणपत्र (आर. सी.) जारी करने वाले पंजीकरण प्राधिकारी भी हैं।


इनके द्वारा उत्प्रवास अधिनियम, 1983 की निम्नलिखित शक्तियों का उपयोग किया जाता है: उत्प्रवास अधिनियम, 1983 की धारा 11 और 12 के अंतगर्त पंजीकरण प्रमाणपत्र प्रदान करने का अधिकार और अधिनियम की धारा-13 के अंतगर्त उसे नवीनीकृत करने का अधिकार।



• अधिनियम की धारा-14 के अंतगर्त पंजीकरण प्रमाणपत्र को निलंबित, रद्द और ख़ारिज करने का अधिकार।


• अधिनियम के अध्याय चतुर्थ की धारा 15 (2) के अंतगर्त विदेशी नियोक्ता (एफ. ई.) और परियोजना निर्यातक (पी. ई.) को परमिट जारी करने का धिकारा।


● अधिनियम की धारा-24 और 25 के अंतगर्त सीबीआई या राज्य पुलिस विभाग को अपराधों और दंड के लिए अभियोजन की मंजूरी देने का अधिकार।


• सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के अंतगर्त सीमा शुल्क के एक अधिकारी को प्रदत्त अधिकारों की


तरह तलाशी लेने, जब्त करने और व्यक्तियों / वाहन, आदि को गिरफ्तार करने का अधिकार।


• भर्ती एजेंटों को किसी भी रिटर्न, रिकार्ड या रजिस्टर जमा करने के लिए आदेश देने और अधिनियम की धारा 36 के अंतगर्त उनकी जाँच के साथ-साथ भर्ती एजेंटों के कायार्लय का निरीक्षण करने का अधिकार


• अधिनियम की धारा-37 के अंतगर्त सिविल कोर्ट की शक्ति


• अधिनियम की धारा-3 (4) के अंतगर्त किसी भी उत्प्रवासी संरक्षक को आवंटित सभी या किसी भी कार्य के निष्पादन करने का अधिकार।


उपरोक्त सभी कार्य में पीजीई को 10 क्षेत्रीय अधिकारियों द्वारा सहायता प्रदान की जाती है, जिन्हें उत्प्रवासी संरक्षक के रूप में भी जाना जाता है।