अल्पसंख्यक प्रबंधन : स्वतंत्र मॉरीशस की राजनीति - Minority Management: The Politics of Independent Mauritius

अल्पसंख्यक प्रबंधन : स्वतंत्र मॉरीशस की राजनीति - Minority Management: The Politics of Independent Mauritius


12 मार्च, 1968 ई. को मॉरीशस कामनवेल्थ के अंतर्गत स्वतंत्र घोषित कर दिया गया। नए प्रधानमंत्री रामगुलाम ने फेबियन समाजवाद को अपनाते हुए कल्याणकारी राज्य एवं मुफ्त शिक्षा व्यवस्था लागू किया। बहु-नृजातीय समाज के विभिन्न घटकों एवं उनके हितों को संतुष्ट करने के लिए मंत्रिमंडल में स्थान दिया गया। स्वतंत्र मॉरीशस में प्रतिभा के स्थान पर जातीयता को प्रधानता देते हुए प्रभावी सरकार चलाना एक जटिल चुनौती बनी रही।


मॉरीशस में एथनिक राजनीति और भ्रष्टाचार के कारण निरंतर बढ़ते असंतोष की पृष्ठभूमि में खुले तौर पर संप्रदायवाद विरोधी प्लेटफार्म क्लब डेस एटुडिएट्स मिलिटेंट्स का गठन हुआ जो आगे चलकर युवा का मॉरिशसी पाल रेमंड बेरेंजे के नेतृत्व में मूवमेंट मिलिटेंट मरिशिएन (MMM) में परिवर्तित हो गया।

एम. एम. एम. के सुधारवादी विचारों से मॉरीशस की युवा एवं कार्यशील वर्ग दोनों प्रभावित थे। इस दल ने ट्रेड यूनियनों के साथ मिलकर 1971 ई. में मॉरीशस के सबसे बड़े हड़ताल का आरंभ किया। निर्यात प्रसंस्करण क्षेत्रों की स्थापना एवं पर्यटन उद्योग ने मॉरीशस की अर्थव्यवस्था को गतिशील बनते में सहायता की। हालाँकि, 1976 ई. के चुनाव में अल्पसंख्यकों ने एम एम. एम. का पूर्ण समर्थन किया और एक राष्ट्रीय अभिमत भी उभरने लगा, लेकिन एम. एम. एम. ने भी चुनावी प्रत्याशी खड़ा करने में निर्वाचन क्षेत्र की एथनिक संरचना को ध्यान में रखा। इस प्रकार इस दल ने भी मुख्यतः मॉरीशस की स्वतंत्रता के बाद से प्रचलित राजनैतिक समीकरणों को ही अपना लिया।


1980 ई. में आर्थिक संकट ने बेरोजगारी में तेजी से बढ़ोत्तरी की और मॉरीशस रुपये के अवमूल्यन ने लोगों की क्रय शक्ति को कम कर दिया। 1982 ई. के चुनाव में एम. एम. एम. ने अलग हुए हिंदूधड़े के साथ मिलकर पारती सोशलिस्ते मॉरिशिएन (पी. एस. एम.) बैनर तले भाग लिया। इस दल ने अप्रत्याशित सफलता अर्जित करते हुए 60-0 से जीत प्राप्त की और अनिरुद्ध जगन्नाथ प्रधानमंत्री बने एवं पाल बेरेंजे को वित्त मंत्री का पद भार दिया गया। बहुत जल्दी ही पाल बेरेंजे और पी. एस. एम. के हरीश बुधू के बीच मतभेद सामने आने लगे साथ ही नीतियों को लेकर एम. एम. एम. में आंतरिक असहमति प्रकट होने लगी।

अंततः दल के विभाजन के कारण 1983 में सरकार भंग हो गई। मुस्लिम और क्रियोल बेरेंजे के समर्थक बने रहे, जबकि हिंदू गुट जगन्नाथ समर्थक रहा। जगन्नाथ द्वारा मूवमेंट सोशलिस्ते मॉरिशिएन (एम. एस. एम.) का गठन किया गया और इस दल ने मजदूर दल एवं पी. एम. डी. एस. के साथ गठबंधन कर लिया। जगन्नाथ के नेतृत्व में इस दल ने बेरेंजे को पराजित कर चुनाव में जीत हासिल की। 1987 ई. में एम. एस. एम. गठबंधन ने पुनः जीत हासिल की, लेकिन अल्पसंख्यक असंतोष ने फुटबाल (अधिकांश टीमें एथनिक आधार पर गठित) के मैचों में हिंसात्मक रूप ले लिया। क्रियोल बहुसंख्यक पार्टी पी. एम. एस. डी. सत्ता से अलग हो गई। बेहतर अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व के लिए जगन्नाथ अपने पुराने दल की ओर लौट गए और एम. एम. एम. के साथ गठबंधन कर 1991 ई. में चुनाव में जीत हासिल की।

12 मार्च, 1991 ई. को मॉरीशस एक गणतंत्र बन गया। पूर्व मजदूर दल के तमिल राजनेता सर वीरासामी रिंगाडू प्रथम राष्ट्रपति बने। सन् 1992 में एम. एम. एम. के एक मुस्लिम नेता कस्साम उत्तीम को राष्ट्रपति बनाया गया। इसी अवधि में इस्लामिक पार्टी इज्बुल्लाह गठित की गई। इस दल द्वारा सन् 1995 में बेस्ट लूजर पद्धति के तहत पहली बार विधान सभा के लिए एक सीट पर जीत हासिल की गई। तेरह वर्ष से निरंतर सत्ता में बने रहने के बाद 1995 ई. में जगन्नाथ का एम. एस. एम. दल मजदूर एवं एम. एम. एम. के गठबंधन के हाथों 60-0 से पराजित हो गई और मजदू दल के नवीन रामगुलाम प्रधानमंत्री बने।


फरवरी, 1999 ई. में लोकप्रिय रास्ताफ्रियन गायक काया के पुलिस अभिरक्षा में निधन हो जाने के बाद मॉरीशस में भारी हिंसात्मक उपद्रव हुए। इस क्रियोल समर्थित आंदोलन के विरोध में युवा हिंदुओं ने भी उम्र हिंसात्मक गतिविधियों का सहारा लिया। जिसके फलस्वरूप असुरक्षा और मायूसी का वातावरण बन गया। एम. एम. एम. के पाल बेरेंजे और एम. एस. एम. के जगन्नाथ के बीच सत्ता की साझेदारी हेतु नया फार्मूला तैयार किया गया। इस संयुक्त दल ने 2000 ई. के चुनावों में सफलता प्राप्त की। एथनिक गतिरोध को तोड़ने के लिए गैर-हिंदू को प्रधानमंत्री बनाने पर सहमति हुई। इस दल से यह अपेक्षित था कि राजनीति में एथनिक तत्वों की अपेक्षा बुद्धिजीवी समूह को स्थान दिया जाए। मॉरीशस की राजनीति का यह एक लक्ष्य है, जो अभी तक पूरा नहीं किया जा सका है। गैर-सांप्रदायिक प्लेटफार्म