भारतीय डायस्पोरा के प्रति भारतीय राज्य की नीति : लक्ष्मीमल सिंघवी समिति की रिपोर्ट - Policy of the Indian State towards the Indian Diaspora: Laxmmil Singhvi Committee Report
भारतीय डायस्पोरा के प्रति भारतीय राज्य की नीति : लक्ष्मीमल सिंघवी समिति की रिपोर्ट - Policy of the Indian State towards the Indian Diaspora: Laxmmil Singhvi Committee Report
भारतीय मूल के लोगों एवं अनिवासी भारतीय लोगों के अपने बसावट के देशों में किए गए महत्वपूर्ण योगदान को दृष्टिगत रखते हुए यह पाया गया कि वे लोग भारत के विकास में योगदान करने के साथ-साथ भारत और इन देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने में प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं। साथ ही भारत सरकार विदेशों में कार्यरत भारतीय समूहों के हितों एवं कल्याण की सुरक्षा के प्रति वचनबद्ध है। इन स्थितियों में भारत से इनके जुड़ाव को सुविधाजनक बनाने की प्रक्रियाओं एवं नियमों को स्पष्ट करने की आवश्यकता को दृष्टिगत रखते हुए भारत सरकार द्वारा डॉ. लक्ष्मीमल सिंघवी के नेतृत्व में भारतीय डायस्पोरा पर उच्च स्तरीय समिति गठित करने का निर्णय लिया गया।
इस समिति का गठन 18 अगस्त, 2001 ई. को किया गया और इस समिति को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए 180 दिनों का समय दिया गया था। इस समिति द्वारा अपनी रिपोर्ट 19 दिसंबर, 2001 को प्रस्तुत की गई।
सिंघवी समिति द्वारा अपने प्रत्यावेदन में प्रवासी भारतीयों को जोड़ने के संबंध में शुरुआत करने की संस्तुतियाँ की गई जिनमें सम्मिलित हैं:
(i) पी. आई. ओ. कार्ड स्कीम में सुधार।
(ii) प्रत्येक वर्ष 9 जनवरी को प्रवासी भारतीय दिवस मनाया जाना (इस दिन महात्मा गांधी
दक्षिण अफ्रीका से भारत वापस लौटे थे)।
(iii) प्रवासी भारतीय सम्मान (महत्वपूर्ण पी. आई. ओ. तथा एन. आर. आई. लोगों के लिए) का प्रारंभ किया जाना।
पाँच खंडों एवं 38 अध्यायों में विभक्त इस रिपोर्ट में उपरोक्त संस्तुतियों के अलावा हवाई अड्डों पर पी. आई. ओ. काउंटर की स्थापना, एन. आर. आई/ पी. आई. ओ. से विवाहित महिलाओं के कल्याण तथा विदेशों में भारतीय श्रमिकों की समस्याओं आदि अन्य मुद्दों को भी सम्मिलित किया गया। इसके अतिरिक्त इसमें संस्कृति, आर्थिक विकास, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा मीडिया शीर्षक के अंतर्गत विषयवार संस्तुतियाँ की गई
मंत्रालय का गठन
आरंभ में इस मंत्रालय का गठन मई, 2004 में अनिवासी भारतीय मामले Ministry of Non- Resident Indians' Affairs के नाम से किया गया।
सितंबर, 2004 में इसका नाम बदल कर प्रवासी भारतीय कार्य मंत्रालय Ministry of Overseas Indian Affairs (MOIA) कर दिया गया। मूलतः मंत्रालय का स्वरूप सेवा प्रदाता का है। यह मंत्रालय विदेशों में रहने वाले भारत-वंशियों से जुड़ी सभी सूचनाओं, भागीदारियों एवं सहूलियतों की देखभाल करने के लिए गठित किया गया है।
मंत्रालय का विदेश मंत्रालय में विलय
प्रवासी भारतीय कार्य मंत्रालय का विलय विदेश मंत्रालय में कर दिया गया भारतीय डायस्पोरा को भारत के करीब लाने के उद्देश्यों को और अधिक प्रतिबद्ध तरीके से लागू करने के लिए इन दोनों मंत्रालयों को मिलाने का निर्णय लिया गया।
प्रवासी भारतीय कार्य मंत्रालय की अधिकांश नीतियाँ कार्यक्रम, योजनाओं एवं पहलों का क्रियान्वयन विदेशों में भारतीय दूतावासों / वाणिज्यिक दूतावासों के माध्यम से ही किया जा सकता था। विदेशों में कार्यरत भारतीय नागरिकों से जुड़े मुद्दे, उनके कल्याण और संरक्षण में भी विदेश मंत्रालय एवं भारतीय मिशनों की भूमिका प्रभावी होती है इस प्रकार भारतीय डायस्पोरा एवं प्रवासी भारतीय लोगों से जुड़े मुद्दों को विदेश मंत्रालय द्वारा अधिक दक्षता से हल किया जा सकता है।
अन्य विभागों को सौंपे गए विशिष्ट मुद्दों को छोड़कर, समुद्रपारीय भारतीय लोगों (जिनमें भारतीय मूल के व्यक्ति PIOs एवं अनिवासी भारतीय NRIs सम्मिलित हैं) से संबंधित सभी मुद्दोंकी जिम्मेदारी प्रवासी भारतीय कार्य मंत्रालय को सौंपी गई थी।
प्रवासी भारतीय कार्य मंत्रालय इन मुद्दों को 2004 से निपटा रहा था, लेकिन मंत्रालय के विदेश मंत्रालय एवं दूतावासों पर निर्भरता एवं भूमिकाओं में दोहराव के कारण मंत्रालय की अधिकांश नीतियाँ कार्यक्रम, योजनाओं एवं पहलों का क्रियान्वयन सही तरीके से नहीं हो पा रहा था। साथ ही मंत्रालय के छोटे आकार के कारण सौंपे गए उद्देश्यों को पूरा करने लायक संस्थागत व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी। इसी कारण दोनों मंत्रालयों के विलय से भारतीय डायस्पोरा से जुड़ने और विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदायों की समस्याओं के समाधान के प्रयासों में और अधिक गहराई आने के साथ-साथ संसाधनों को और बेहतर तरीके एवं दक्ष तरीके से प्रयोग में लाया जा सकता है। इस आधार पर 7 जनवरी, 2016 ई. को इस मंत्रालय का विलय विदेश मंत्रालय में कर दिया गया।
मंत्रालय के कार्य
विदेश मंत्रालय का यह डिवीजन विदेशों में बसे बहुसंख्यक भारतीय नागरिकों के लिए समर्पित है। वर्तमान दशाओं में उभरते एक सीमाविहीन विश्व में यह अनुभाग भारतीय डायस्पोरा समुदाय को अपनी मातृभूमि से जोड़ने के लिए सक्रिय है। इसका गठन एक 'सेवा' अनुभाग के रूप में किया गया है। यह प्रवासी भारतीयों (भारतीय मूल के व्यक्ति पीआईओ और अनिवासी भारतीय एनआरआई) से संबंधित सभी मामलों की जानकारी भागीदारी और सुविधा प्रदान करता है। यह अनुभाग वर्तमान में प्रवासी भारतीय लोगों को निम्नलिखित चार प्रकार की सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं:
डायस्पोरा सेवाएँ Diaspora Services
वित्तीय सेवाएँ Financial Services
उत्प्रवास सेवाएँ Emigration Services
प्रबंधन सेवाएँ Management Services
प्रथम दो अनुभागों के प्रमुख संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी होते हैं। उत्प्रवासी महासंरक्षक (The Protector General of Emigrants (PGoE)) विदेशी रोजगार सेवा ( Overseas Employment Services) अनुभाग के प्रमुख होते हैं।
सामाजिक सेवा एवं प्रबंधन सेवा अनुभाग उपसचिव स्तर के अधिकारियों द्वारा संचालित होते हैं। इस मंत्रालय द्वारा वर्ष 2003 से प्रवासी भारतीय दिवस का आयोजन किया जाता है। आरंभ से यह प्रत्येक वर्ष 9 जनवरी को आयोजित किया जाता है, लेकिन इसे वर्ष 2016 से द्विवार्षिक कर दिया गया। इसी आयोजन के साथ प्रवासी भारतीय सम्मान भी प्रदान किया जाता है।
यह अनुभाग विदेश में बसे भारतवंशी समूहों के बीच नेटवर्क के विकास एवं भारतीय डायस्पोरा के बीच पारस्परिक साझेदारी के निर्माण के उद्देश्य से गठित किया गया है। प्रवासी भारतीयों से संबंधित सभी मामलों से निपटने के साथ-साथ यह अनुभाग व्यापार और निवेश, उत्प्रवास, शिक्षा, संस्कृति, स्वास्थ्य और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के लिए भारतीय डायस्पोरा के साथ विभिन्न पहलों को आगे बढ़ाने में लगा हुआ है।
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