लोकोक्ति - proverb

लोकोक्ति - proverb


सामान्यतः लोकोक्ति शब्द की व्युत्पत्ति 'लोक + उक्ति' से मानी जा सकती है। इसके अनुसार लोक की उक्ति ही लोकोक्ति है । इस शब्द के व्यापक अर्थ को ग्रहण करने पर लोक (जनसाधारण) के चमत्कारपूर्ण प्रत्येक कथन को लोकोक्ति कहा जा सकता है किन्तु प्रकीर्ण साहित्य के अन्तर्गत लोकोक्ति शब्द कहावतों के अर्थ में रूद हो गया है। लोकोक्तियों का प्रचलन संसार की सभी सभ्यताओं में मिलता है। ये लोक-साहित्य की सशक्त विधा है जिसमें लोकाभिव्यक्ति के लिए अभिव्यंजना कौशल, उक्ति वैचित्र्य और सूत्र शैली का प्रयोग किया जाता है।

ये प्रायः अभिधात्मक न होकर लक्षणात्मक और व्यंजनात्मक होती हैं। अतः इनमें 'गागर में सागर' नहीं वरन् 'बिन्दु में सिन्धु' की प्रवृत्ति दृष्टिगोचर होती हैं। इन लोकोक्तियों के लघु आकार में चिरसंचित अनुभवजन्य ज्ञान - राशि के साथ ही संस्कृति के तत्त्व, पौराणिक कथाओं के स्वरूप और ऐतिहासिक घटनाओं का भी समावेश रहता है। इस प्रकार लोकोक्ति अपने लघु आकार में भी एक विशाल राष्ट्र, सभ्यता और संस्कृति के स्वरूप को प्रतिबिम्बित करने की अद्भुत क्षमता रखती है।