पहेलियाँ - puzzles

पहेलियाँ - puzzles


लोक-साहित्य की प्रकीर्ण विधाओं में मनोरंजन की दृष्टि से पहेली का महत्त्वपूर्ण स्थान है। यह लोक मानस की पुरातन अभिव्यक्ति है जिसमें मनोरंजन के साथ-साथ बुद्धि-विलास के भी पर्याप्त अवसर होते हैं। इसके अन्तर्गत चिर-परिचित वस्तुओं के सम्बन्ध में रहस्यात्मक, लयात्मक प्रश्न पूछा जाता है जबकि अन्य व्यक्ति को उसका उत्तर देना होता है। इस प्रकार व्यक्ति की बुद्धि की परीक्षा लेने के लिए जो भ्रामक प्रश्न पूछे जाते हैं, उन्हें 'पहेली' कहा जा सकता है। संस्कृत में इसे 'प्रहेलिका' कहा जाता है तो आम बोलचाल की भाषा में 'बुझौवल' शब्द का भी प्रयोग किया जाता है। 'पहेली बुझाना' एक मुहावरा है जिसका अर्थ है, 'अपनी बात इस प्रकार कहना कि श्रोता को सहज ही समझ न आ सके।' पहेली के स्वरूप को स्पष्ट करने के लिए कुछ विद्वानों के कथन द्रष्टव्य हैं-


"पहेली किसी की बुद्धि या समझ की परीक्षा लेने के लिए एक प्रकार का प्रश्न, वाक्य या वर्णन है, जिसमें किसी वस्तु का भ्रामक या टेढ़ा-मेढ़ा लक्षण देकर उसे बूझने या अभीष्ट वस्तु का नाम बताने को कहा जाता है।"


- बृहत् हिन्दी कोश


"पहेलियाँ मनोरंजन का उत्कृष्ट साधन हैं। बुद्धिमान भी कभी-कभी इनके कौतूहल मिश्रित अर्थगौरव के सामने सिर झुका देते हैं। अस्पष्ट संकेत देकर सामने वाले से वस्तु का नाम पूछना वस्तुतः बुद्धि परीक्षा के समान ही व्यापार है।"


- डॉ. त्रिलोचन पाण्डेय


" परस्पर मानसिक स्तर तथा बौद्धिक विकास को परखने के लिए पहेलियाँ पूछने की लम्बी परम्परा रही है। अतः मौखिक साहित्य में इनका निजी स्थान है। ये मनोरंजन का बहुत बड़ा साधन हैं । पहेली में किसी साधारण बात को इस ढंग से पूछा जाता है कि श्रोता के मस्तिष्क पर दबाव पड़ता है और वह गणित के प्रश्न की तरह उत्तर ढूँढने की चेष्टा में खो जाता है।"


- डॉ. उर्बादत्त उपाध्याय