लोक नाट्यों के प्रकार - types of folk dramasv
लोक नाट्यों के प्रकार - types of folk dramasv
लोक-नाट्यों के प्रकार स्पष्ट करने हेतु विद्वानों ने बहुतसे आधार बताए हैं। जैसे बोली या भाषा, -. भौगोलिक परिस्थितियाँ, रंगमंच का प्रकार, लोक नाट्य के तत्त्वों का आधार, विशेष पर्व या उत्सव का आधार, लोक नाट्य का उद्देश्य के आधार पर अभिनय, वाद्य या गायकी का आधार आदि। किन्तु इन सभी आधारों को स्वीकार कर वर्गीकरण करने पर भी लोक-नाट्यों के प्रकारों का समुचित वर्गीकरण करने में कठिनाई होती है। विद्वानों ने लोक नाट्यों के किनानुसार भेद बताए हैं-
डॉ. श्याम परमार ने लोकधर्मी नाट्य परम्परा को इस प्रकार वर्गीकृत किया है-
1. सामयिक लघु प्रहसन, नाटिका
(1) प्रहसन :
स्त्रियों द्वारा / पुरुषों द्वारा / बालक-बालिका द्वारा
होली के अवसर पर पुरुषों द्वारा / बहुरूपियों द्वारा
(2) स्वाँग या नकल (3) भाँड-भेंडेती
पेशेवर लोगों द्वारा
2. मध्य रात्रि से प्रारम्भ होकर प्रातः काल तक अभिनेय गीति नाट्य-
(1) धार्मिक पौराणिक कथाओं पर आधारित
(2) ऐतिहासिक मध्यकालीन ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित
(3) लौकिक- किंवदन्तियों पर आधारित
डॉ. सत्येन्द्र द्वारा किया गया लोक-नाट्यों का प्रवृत्यात्मक वर्गीकरण इस प्रकार है-
1. नृत्य प्रधान
2. नाट्य हास्य प्रधान
3. संगीत प्रधान कथाबद्ध 4. नाट्य वार्ता प्रधान
डॉ. अर्जुनदेव चारण ने लोकधर्मी नाट्य परम्परा को इस प्रकार वर्गीकृत किया है। -
1. आनुष्ठानिक लोक नाट्य
2. उत्सव के लोक नाट्य
3. व्यावसायिक लोक नाट्य
डॉ. कृष्णदेव उपाध्याय द्वारा लोक नाट्यों का किया गया वर्गीकरण इस प्रकार है-
1. प्रहसनात्मक लोक नाट्य
2. नृत्यनाट्यात्मक लोक नाट्य (डांस-ड्रामा)
डॉ. महेन्द्र भानावत ने लोकधर्मी नाट्य-परम्परा को इस प्रकार वर्गीकृत किया है-
1. ख्याल
2. स्वांग
3. लीलाएँ (राजस्थानी लोक नाट्यों के आधार पर)
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